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Tuesday, July 21, 2020

पिछले साल 1.50 लाख टैक्सेबल प्राॅपर्टीज में से सिर्फ 49 हजार ने भरी रिटर्न, अब ओटीएस में भी रुझान कम

पिछले साल यानी कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में शहर की डेढ़ लाख टैक्सेबल प्राॅपर्टीज में से सिर्फ 49 हजार लोगों ने 1.46 लाख रुपए प्राॅपर्टी टैक्स रिटर्न दाखिल की थीं। मैप माय इंडिया कंपनी ने वर्ष 2014 में किए गए सर्वे में शहर में कुल 2.58 लाख प्राॅपर्टीज बताईं थी, इसमें एक लाख प्राॅपर्टीज टैक्स फ्री कैटेगिरी में आती हैं। जिससे स्पष्ट है कि नगर निगम के अफसर प्राॅपर्टी टैक्स कलेक्शन में बहुत पीछे चल रहे हैं।

दूसरी तरफ 31 जुलाई तक बढ़ाई गई वन टाइम सेटलमेंट स्कीम (ओटीएस) में भी लोगों का ज्यादा रुझान नहीं दिख रहा है। इस साल 1 अप्रैल से लेकर 21 जुलाई तक 1.40 करोड़ प्राॅपर्टी टैक्स आया है,जबकि पिछले साल इस अवधि में 3 करोड़ टैक्स जमा हुआ था। यह जानकारी प्रापर्टी टैक्स सुपरिंटेंडेंट ने नवनियुक्त ज्वाइंट कमिश्नर रोहित गुप्ता की तरफ से रखी गई मीटिंग में दी।

सरकार की तरफ से ओटीएस की तिथि 31 जुलाई तक बढ़ाई गई है। इसमें एकमुश्त टैक्स अदा करने पर 10 फीसदी की रिबेट के साथ ही जुर्माना और ब्याज माफ किया गया है। वहीं 31 जुलाई तक पुराना बकाया टैक्स माफ नहीं भरने की सूरत में अगले तीन महीने यानी कि 31 अक्टूबर तक 10 फीसदी जुर्माना पड़ेगा। इसके बाद फिर 20 फीसदी जुर्माना के साथ ही वर्ष 2013-14 से जुर्माना भी लगेगा।

51 से 125 गज तक निल रिटर्न भरना जरूरी

पंजाब सरकार की तरफ से 50 गज तक बहुमंजिला बिल्डिंग (रेजिडेंशियल) को टैक्स माफ किया गया है। वहीं 51 गज से 125 गज तक ग्राउंड फ्लोर होने की सूरत में ही टैक्स माफ है लेकिन इनके लिए प्राॅपर्टी टैक्स रिटर्न भरनी लाजिमी है। अगर इस कैटेगिरी ने ग्राउंड फ्लोर पर एक भी नई मंजिल बनवाई तो उसे टैक्स भरना पड़ेगा। वहीं अगर 51 गज से लेकर 125 गज तक वाले मकान के मालिक ने पहले निल की रिटर्न नहीं भरी और अब एक मंजिल भी ऊपर डाल ली तो फिर 2013-14 से टैक्स भरना पड़ेगा।



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