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Sunday, July 19, 2020

2 स्टाफ नर्सों और 2 दर्जाचार मुलाजिमों पर कार्रवाई मगर 3 सदस्यीय बॉडी डिस्पोज ऑफ कमेटी को छोड़ा

गुरु नानक देव अस्पताल प्रबंधन पीपीई किट घोटाले के बाद अब होशियारपुर और अमृतसर केे दो कोरोना मरीजों के शवों की अदला-बदली के मामले में भी अफसरों पर कार्रवाई के बजाय लीपापोती करने में जुट गया है। प्रबंधन ने मामला उछलने के बाद दो स्टाफ नर्सों मनजीत कौर, गुरिंदर कौर और दो दर्जाचार मुलाजिमों सुनील व चंदा को सस्पेंड कर दिया।

मगर जिस तीन सदस्यीय ‘बॉडी डिस्पोज ऑफ कमेटी’ की जिम्मेदारी शवों को उनके वारिसों तक पैक करके पहुंचाने की है, उसे छोड़ दिया गया है। आला अिधकारियों से लेकर मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च मिनिस्टर ओपी सोनी तक जिला प्रशासन की मजिस्ट्रियल जांच और अस्पताल प्रबंधन की तीन सदस्य कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई का हवाला दे रहे हैं।

यह कमेटी अस्पताल के डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की अगुवाई में काम करती है। उनके अलावा इस टीम में एक एनेस्थीसिया और एक एनाटॉमी विभाग का डॉक्टर होता है। सूत्रों के अनुसार इस टीम के अिधकारी कोरोना मरीजों के शवों की पैकिंग और टैगिंग करवाने के लिए खुद न जाकर जूनियर्स को भेज देते थे।

होशियारपुर के मुकेरियां के प्रीतम सिंह और अमृतसर के डैमगंज की पदमा की लाशों के मामले में भी ऐसे ही हुआ। जिन दर्जाचार मुलाजिमों को सस्पेंड किया गया, उनका कहना है कि उन्हें डॉक्टरों ने जैसे कहा वे वैसे ही करते रहे। इससे साफ है कि जिनकी जिम्मेदारी थी, उन पर कार्रवाई नहीं की गई।

डिप्टी एमएस हैं डिस्पोज ऑफ कमेटी के हेड, पैकिंग-टैगिंग कराना जिम्मा

भले ही खुद की साख बचाने के लिए दो नर्सेज को सस्पेंड और 2 दर्जा चार मुलाजिमों को हटा दिया गया है, लेकिन यह लोग सीधे तौर पर कहीं भी इन मामले के दोषी नहीं हैं। अगर हम रुटीन प्रक्रिया पर नजर डालें तो स्पष्ट है कि नर्सेज का काम इलाज में मदद करना और अगर मरीज की मौत हो जाती है तो उसके शरीर से सभी मेडिकल इक्यूपमेंट आदि को हटाने का काम उनका होता है।

मौत के बाद डॉक्टरों की टीम (बॉडी डिस्पोज ऑफ कमेटी) की देखरेख में शव को सेनिटाइज करके उसे पैक करने का काम दर्जा चार मुलाजिम करते हैं। इस दौरान टैग लगाने का काम भी दर्जा चार मुलाजिम करते हैं, लेकिन यह सारा काम उक्त टीम की देखरेख में होता है।

टैग पर नाम लिखने का काम भी डॉक्टरों का होता है। यहां से शव हो अस्पताल से बाहर लाया जाता है फिर उसे एंबुलेंस के जरिए सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थित डेड हाउस या फिर माॅर्चरी में उक्त कमेटी की देख-रेख में भेजा जाता है, जहां से शव को परिवार वालों की मौजूदगी में जिला प्रशासन को दिया जाता है और उक्त टीम के लोग संस्कार करवाने तक निगरानी रखते हैं। सारे प्रोसेस की वीडियोग्राफी भी होती है।

गलती मरीजों के मामले में गठित कमेटी की: नर्सिंग यूनियन

नर्सिंग यूनियन की दिलराज कौर और लखविंदर कौर ने दो नर्सों के खिलाफ कार्रवाई को निंदनीय और गलत बताया है। उनका कहना है कि जिस गलती की सजा उनके लोगों को दी जा रही है, उसमें उनकी कोई भूमिका नहीं होती।

इन लोगों का कहना है कि वह लोग बतौर सहयोगी काम करती हैं और मरीज की सेहत सेवाएं देती हैं। बाकी सारी जिम्मेदारी कोरोना मरीजों के मामले में गठित टीम की होती है।

जिम्मेदाराें काे बचाया जा रहा, कमजोरों पर कार्रवाई : यूनियन

दर्जा चार सरकारी कर्मचारी यूनियन के प्रधान नरिंदर सिंह ने भी दर्जा चार मुलाजिमों और नर्सों के खिलाफ उक्त कार्रवाई को अन्याय बताया है। उनका कहना है कि जो भी प्रकरण हुआ है उसमें उक्त लोगों का कोई रोल नहीं है।

उनका कहना है कि प्रबंधन अपनी साख बचाने और जिम्मेदार लोगों को बचाने के लिए यह लीपापोती कर रहा है। इसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।

डॉक्टरों ने जो कहा, वही किया: सस्पेंड कर्मचारी
सस्पेंड किए गए दर्जाचार कर्मचारी चंदा और सुनील ने बताया कि उन्हें जो डॉक्टरों ने कहा उन्होंने वही किया। वह डॉक्टरों के निर्देशाें का ही पालन करते हैं।

दाेनाें मौतें 1 ही यूनिट में , इसलिए गलती हुई : प्रिंसिपल

^ लाशों में टैैग लगाते वक्त गलती हुई है। टैग दर्जा 4 मुलाजिम लगाते हैं। चूंकि दोनों मौतें एक समय में एक ही यूनिट में हुई थीं और इसी में चूक हो गई। फिलहाल विभाग ने जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है, जो दो दिन में रिपोर्ट दे देगी। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने भी मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। इन जांचों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। फिलहाल मुलाजिमों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
-डॉ. राजीव देवगन, प्रिंसिपल सरकारी, मेडिकल कॉलेज

‘पदमा’ का दूसरी बार संस्कार

पदमा का शव सुबह 11 बजे होशियारपुर से एंबुलेंस के जरिए गुरु नानक देव अस्पताल लाया गया। यहां पर अधिकारियों की मौजूदगी में पदमा के परिवार से संबंधित विकास और अभिषेक को पीपीई किट पहना कर शव की शिनाख्त करवाई गई। इसके बाद एंबुलेंस के जरिए परिवार वालों को साथ लेकर शहीदां साहिब श्मशानघाट ले जाया गया।

श्मशान घाट में ‘पदमा’ का दूसरी बार संस्कार किया गया। पदमा के पिता दविंदर हीरा का कहना है कि अस्पताल की लापरवाही के चलते उनके परिवार को दूसरी बार सदमा झेलना पड़ा है।

इस संदर्भ में शहीदां साहिब श्मशानघाट के अधिकारी केजी अरोड़ा ने बताया कि प्रीतम सिंह का संस्कार भी पदमा के नाम से किया गया था और रविवार को पदमा का तो उसके नाम से ही किया गया। उन्होंने बताया कि प्रीतम सिंह का परिवार आएगा तो उनके नाम की स्लिप बना कर दी जाएगी।

पदमा की ज्वैलरी गायब

पदमा के पिता दविंदर हीरा ने आरोप लगाया है कि पदमा ने सोने की अंगूठियां और टॉप्स पहने थे। इसमें से एक मुंदरी और एक टॉप्स ही परिवार को दिया गया है। गायब हुए गहनों की कीमत तकरीबन 70 से 80 हजार रुपए है। दविंदर हीरा के मुताबिक उन्होंने पुलिस को इस संबंध में शिकायत दे दी है।

जांच में अफसरों की गलती पाई गई ताे उन पर कार्रवाई होगी : साेनी

^ बहुत बड़ी गलती है और ऐसा होना नहीं चाहिए था, लेकिन हालात ही ऐसे बने कि वह कुछ हो गया, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। फिलहाल तत्काल प्रभाव से 4 मुलाजिमों पर कार्रवाई की गई है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। रिपोर्ट में किसी अफसर की गलती पाई गई ताे उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हाेगी। आगे से ऐसा न हो इसके लिए उचित और कड़े कदम उठाए जाएंगे। चूंकि मामला गंभीर और लोगों की भावनाओं से जुड़ा है, इसलिए कार्रवाई की गई है।
-ओम प्रकाश सोनी, मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च मंत्री




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शव की शिनाख्त करने पहुंचे पदमा के भाई विकास ने बताया कि शव को एंबुलेंस में बड़ी ही लापरवाही से रखा गया था। उससे बदबू आ रही थी।


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