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Saturday, July 18, 2020

सरगुजा संभाग में बिना चबूतरे के बने ज्यादातर कुएं, 6 साल में 43 लोगों की डूबने से मौत, इनमें 33 बच्चों की गई जान

लव दुबे | सरगुजा संभाग में बिना चबूतरे के कुएं जानलेवा बन गए हैं। पिछले 15 दिन में ही सरगुजा व बलरामपुर जिले में कुएं में गिरने की अलग-अलग घटना में 9 लोगों की जान चली गई। इनमें 8 बच्चे हैं जो खेलते हुए कुएं में गिरे और मौत हो गई। जिले में 6 साल में 43 लोगों की कुएं में गिरने से मौत हुई है। इनमें 33 बच्चे हैं। सबसे अधिक मौतें सीतापुर इलाके में हुई हैं।
भास्कर को पड़ताल में पता चला है कि ज्यादातर मौतें बरसात के सीजन में हुई हैं। इस समय घास और झाड़ियां बढ़ने के बाद बिना चबूतरे के कुएं दिखाई नहीं देते हैं। इससे बच्चे गिर जाते हैं, जिन लोगों की कुंए में गिरने से मौत हुई है। तीन दिन पहले सीतापुर इलाके में कुएं में गिरने से भाई बहन की मौत हो गई। पड़ताल में पता चला है कि ये सभी कुएं सुरक्षित नहीं थे। लोगों ने अपनी जरूरत के लिए घर के आसपा कुएं खोद दिए लेकिन चबूतरे नहीं बनाए। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार चबूतरे के लिए मांग कर चुके हैं, लेकिन अधिकारी कहते हैं कि इसके लिए फंड का प्रावधान नहीं है।

संभाग के हर गांव में ऐसे दो से तीन कुएं
पड़ताल में पता कि सरगुजा, सूरजपुर व बलरामपुर जिले के हर गांव में ऐसे दो से तीन कुएं हैं जो बिना चबूतरे के हैं। चबूतरे नहीं होने से कुएं जहां जानलेवा हैं वहीं दूषित पानी से बीमारियाें का डर रहता है। वाड्रफनगर इलाके के गैना गांव में उल्टी दस्त से पिछले साल 4 लोगों की मौत हो गई थी। फसल में लोग कीटनाशक के अलावा खाद का उपयोग करते हैं जिससे पानी दूषित होता है।

मनरेगा में खोदे गए कुएं मेंभी नहीं बने चबूतरे
पिछले सालों में मनरेगा से सरगुजा में एक हजार कुएं खोदे गए, लेकिन ज्यादातर के चबूतरे नहीं बनाए गए। शहर से लगी खैरबार पंचायत में ही ऐसे 18 कुएं हैं। 70 हजार से एक लाख रुपए तक एक कुएं के स्वीकृत हुए थे। पंचायत सचिव हरि सिंह ने बताया कि कुएं खोदकर छोड़ दिए चबूतरे नहीं बनाए।

3 घटनाओं से जानिए किस तरह बुझ गए घरों के चिराग
खेलते समय गिर गए थे कुएं में

सीतापुर थाना क्षेत्र के आमाटोली निवासी लीलाधर नगेसिया और उसकी पत्नी खेत में काम करने गए थे। चार साल का बेटा व दो साल की बेटी घर के बाहर खेल रहे थे। माता-पिता खेत से काम करके लौटे तो दोनों बच्चे दिखाई नहीं दिए। पड़ोसियों ने बाड़ी में जाकर देखा तो दोनों की कुएं में लाश मिली।

2 की कुएं में गिरने से हुई थी मौत
सीतापुर इलाके के नकना में पिछले साल करमा त्योहार मनाने के लिए झारखंड के गढ़वा से एक परिवार आया हुआ था। 9 अक्टूबर 2019 को परिवार के लोग त्योहार मनाने की तैयारी में लगे थे। तभी उनके दोनों बच्चे अमन व उमंग कुएं में गिर गए और दोनों की मौत हो गई।

नहाते समय डूबने से हुई थी मौत
बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर थाना क्षेत्र के देवीगंज गांव में 9 जून को डबरी में गिरने से दो बालिकाओं बबीता व कविता की मौत हो गई थी। दोनों घर से थोड़ी दूर डबरी में नहाने के लिए गई थी। नहाते समय दोनों डबरी में गिर गई, जिससे जान चली गई।

राशि का सही उपयोग नहीं इसलिए नहीं होते काम
अधिकारियों का कहना है कि 13वें व 14वें मद की राशि का सही तरीके से उपयोग हो तो इस तरह की परेशानी नहीं होगी। हर पंचायत में सात से बारह लाख रुपए मिलते हैं। कागजों में ग्राम सभा राशि खर्च कर दी जाती है। 8 से 10 पंचायतों में इस मद से कराए गए कामों की जांच कराई जाए तो स्थिति का पता चल जाएगा किस तरह से इस मद की राशि का उपयोग हो रहा है।

बच्चों पर रखें नजर
ऐसे कुंओं की सुरक्षा के मद्देनजर लकड़ी या फिर लोहे की जाली से घेराव कराएं। वहीं कुएं के पास घास व झाड़ियों की सफाई करते रहें । घर से बाहर जा रहे हैं तो बच्चों को अकेला न छोड़ें ज्यादातर घटनाओं में यह बात सामने आई है कि घर के लोग खेत में काम करने गए थे। बच्चे अकेले थे जो खेलते हुए कुएं में गिर गए।



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Most wells built without platforms in Surguja division, 43 people drowned in 6 years, 33 lives lost in these


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