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Tuesday, July 7, 2020

निगम-मंडलों में बस्तर को मिलेगा महत्व, 6 दावेदार

प्रदेश में निगम-मंडलों और संसदीय सचिवों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज हो चली है। कांग्रेस संगठन इसे लेकर कई दौर की बैठकें कर चुका है और एक लिस्ट दिल्ली भेजी गई है, इस बीच इन नई नियुक्तियों में बस्तर के नेताओं को खासी उम्मीद है। हालांकि किसी भी नेता ने अब तक खुलकर दावेदारी नहीं की है लेकिन बस्तर संभाग में एक दर्जन से ज्यादा नेता इस उम्मीद में हैं कि उन्हें निगम-आयोगों में जगह मिलेगी।
इसके अलावा करीब आधा दर्जन ऐसे नेता हैं जो सीधे आयोग या मंडल अध्यक्ष बनने के श्रेणी में खुद को रख रहे हैं। इसके अलावा कुछ नेता ऐसे भी हैं जिन्हें उम्मीद है कि अध्यक्ष या उपाध्यक्ष न बनें लेकिन सदस्य जरूर बन सकते हैं। अभी बस्तर में स्व महेंद्र कर्मा के परिवार से किसी एक सदस्य को नई नियुक्तियों में एडजस्ट करने की चर्चा है। इसके अलावा बस्तर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता मिथलेश स्वर्णकार, पूर्व महापौर जतिन जायसवाल, शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव शर्मा, बीपीएस अध्यक्ष और झीरम हमला झेलने वाले मलकीत सिंह गैदू, कोंडागांव से वरिष्ठ मनीष श्रीवास्तव का नाम प्रमुख है। इन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके अलावा बस्तर के ऐसे कई युवा नेता हैं जिन्हें अनुभव देने और एडजस्ट करने के लिए सदस्य या उपाध्यक्ष के तौर पर जगह दी जा सकती है। इनमें सबसे प्रमुख नाम सुशील मौर्य, दुर्गेश राय, प्रंशात जैन, अमित भद्र, एजाज खान, विमल सलाम हैं।

जानिए, वह 5 कारण जिनकी वजह से बस्तर कोनिगम-मंडलों में जगह मिलने की सबसे ज्यादा उम्मीद
1. पूरे संभाग की 12 विधानसभा सीटों में 12 कांग्रेस के खाते में: पहला मौका जब बीजेपी यहां से क्लीन स्वीप हुई ऐसे में लालबत्ती में सबसे ज्यादा दावेदारी बस्तर के नेताओं की बनती है।
2. 12 विधायक जितवाने के बाद भी अभी मंत्रिमंडल में बस्तर से सिर्फ एक मंत्री है। ऐसे में अब बस्तर से सत्ता में भागीदारी बढ़ाने की उम्मीद।
3. कांग्रेस ने सत्ता से लेकर संगठन तक में बस्तर को महत्व दिया, पीसीसी चीफ बस्तर से ही हैं, इसके अलावा राहुल गांधी का भी विशेष फोकस बस्तर और यहां के आदिवासियों पर है।
4. बस्तर में ऐसे कई नेता हैं जिन्होंने विपक्ष में रहते हुए तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान सीएम भूपेश बघेल से कंधा से कंधा मिलाकर साथ दिया था। विधानसभा चुनावों के दौरान टिकट वितरण में भी इन्होंने अपनी ओर से मांग नहीं रखी थी।
5. वर्तमान में सत्ता और संगठन में सीएम गुट के लोग हावी हैं, ऐसे में अन्य गुटों के जो बड़े नेता हैं उन्हें भी एडजस्ट करने की कोशिश हो सकती है।



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