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Thursday, July 9, 2020

पहले यात्री नहीं मिलने का रोना, अब ज्यादा किराया लेकर ठूंस-ठूंसकर भर रहे सवारी

यात्री वाहन संचालन शुरू होने के दो दिन बाद ही नियमों की धज्जियां उड़ने लगीं हैं। पहले बस संचालक, चालक, परिचालक यात्री नहीं मिलने का रोना रो रहे थे, अब मिलने लगी तो ठूंस-ठूंसकर भरने लगे। किराया भी ज्यादा ले रहे हैं। सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की शर्त पर बस चलाने की अनुमति दी है। लेकिन बसों में यह सिरे से गायब है। इससे कोरोना संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।गुरुवार सुबह महेंद्रा ट्रेव्हल्स की सेमी स्लीपर यात्री बस क्रमांक सीजी 19 एफ 0271 जगदलपुर से रायपुर के लिए रवाना हुई। जगदलपुर में यात्रियों को बैठाने के दौरान ही नियम तोड़ना शुरू हो गया। बस में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को तोड़ते हुए ठूंस ठूंस कर यात्रियों को बैठाया जाने लगा। एक बर्थ में चार से पांच पांच सवारी बैठाई गई। नीचे वाली सीट में भी एक साथ दो-दो यात्रियों को बैठाया गया जबकि एक सीट में एक ही यात्री को बैठाया जाना है। इसके बाद टिकट काटने का सिलसिला शुरू हुआ। निर्धारित किराया से 25 प्रतिशत तक अधिक किराया वसूला जाने लगा। यात्रियों ने विरोध किया तो कंडेक्टर ने जवाब दिया ऊपर से निर्देश है इसलिए अधिक किराया वसूल रहे हैं।
कंडेक्टर ने धमकाने वाले अंदाज में जवाब दिया तो यात्री खामोश हो गए। जगदलपुर से कांकेर पहुंचे न्यायालय कर्मचारी सत्येंद्र प्लाहा, एमजी वार्ड निवासी श्रवण कुमार ने बताया कि सभी लोगों को साथ साथ बैठाया गया था। पहले वे जगदलपुर कांकेर आना जाना करते थे तो 210 रूपए किराया लिया जाता था। अब 250 रूपए वसूला जा रहा है। अधिक किराया लेने को लेकर कंडेक्टर से पूछा गया तो उसने इसे हेडक्वाटर का आदेश बताया। कंडेक्टर घनाराम सिन्हा ने बताया कि पुरानी किराया सूची के आधार ही किराया वसूला जा रहा है। इस मार्ग पर चलने वाली सभी बसों में लगभग यही हाल है। यात्री बसों पर नियंत्रण करने ना तो परिवहन विभाग और ना ही ट्रैफिक पुलिस गंभीरता से कार्रवाई कर रही है।
यात्रियों का ब्योरा और टिकट में यात्रा विवरण नहीं
जगदलपुर से कांकेर तक आए यात्रियों ने बताया कि बीच बीच में यात्री चढ़ते उतरते रहे। इनमें से कई यात्रियों का न तो टिकट काटा गया और ना ही उनका ब्योरा लिया गया। जो लंबी दूरी के यात्री थे उन्हें टिकट दिया गया। लेकिन इस टिकट में भी ना तो बस का नंबर था और ना ही दिनांक, समय, गंतव्य का उल्लेख था। सिर्फ किराया की रकम लिख टिकट थमा दिया गया। यात्रियों ने उक्त टिकट भी भास्कर को मुहैया कराया जो नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। नियम के अनुसार यात्रियों का पूरा ब्योरा कंडेक्टर के पास मौजूद होना चाहिए।

किराया सूची और बस की केटेगरी भी नहीं लिखी
परिवहन विभाग के अनुसार बसों की अलग अलग कैटेगरी के अनुसार उसका किराया भी अलग अलग है। हकीकत यह है कि कौन सी बस कौन से केटेगरी की है यह बस में कहीं उल्लेख नहीं होता है। बस में किराया सूची भी चस्पा नहीं है जबकि यह अनिवार्य है। इसकी आड़ में यात्रियों से मनमाना किराया वसूला जा रहा है। कांकेर से रायपुर तक के लिए यात्री किराया 250 रूपए वसूला जा रहा है जबकि यह किराया अधिकतम 180 रूपए तक है। जगदलपुर से रायपुर तक रात में 600 रूपए किराया वसूला जा रहा है।

यदि किराया ज्यादा ले रहे तो होगी जांच
अारटीओ ऋषभ नायडू ने कहा कि बस संचालकों द्वारा ज्यादा किराया लेन, नियम तोड़ने की जानकारी नहीं है। यदि ज्यादा किराया लिया जा रहा है तो इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।



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The cry of not getting the first passenger, now the rides are filling up with heavy fare


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