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Thursday, July 30, 2020

मेडिकल कॉलेज में नहीं हो रही कोरोना की जांच, क्योंकि लैब में किट व केमिकल नहीं

मेडिकल काॅलेज अस्पताल में करीब 2 करोड़ की लागत नवनिर्मित वायरोलॉजी लैब में आरटीपीसीआर पद्धति से कोरोना की जांच के लिए आईसीएमआर(इंडियन कौंसिल आफ मेडिकल रिसर्च) दिल्ली से आईडी व पासवर्ड जारी हो गया, लेकिन किट व कुछ कैमिकल की कमी ने टेस्ट शुरू करने में बड़ा अड़ंगा लगा दिया है।
टेस्ट के लिए रैक्ट फिल्टर किट की जरूरत होती है। यह विशेष प्रकार की किट होती है। इसके अलावा कुछ केमिकल है। इसके िबना लैब में जांच नहीं हो सकती है। सीजीएमएससी ने मशीन तो इंस्टाल कर दिया, लेकिन रैक्ड किट व कैमिकल के लिए अब हाथ खड़ा कर दिए हैं। इससे अस्पताल प्रबंधन पूरी तैयारी के बाद जांच शुरू नहीं कर पा रहा है। अब वह अपने स्तर पर इसके प्रबंध में जुटा है लेकिन सफलता नहीं मिल पाई है।

एक दिन में 700 सैंपल की हो सकेगी जांच
बताया जा रहा है कि किट व केमिकल की पूरे प्रदेश में कमी है। यही वजह है कि दूसरे सरकारी वायरोलॉजी लैब में समय पर जांच नहीं हो पा रही है और रिपोर्ट मिलने में तीन से चार दिन लग जा रहे हैं। यदि मेडिकल काॅलेज अंबिकापुर में आरटीपीसीआर से जांच शुरू हो जाए और पूरा सेटअप हो तो अंबिकापुर में एक दिन में लगभग 700 सैंपल की जांच हो सकती है।

विभागों से अटैच कर कर्मियों को दिया प्रशिक्षण
कोरोना को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के टेक्नीशियन व कम्प्यूटर ऑपरेटरों को मेडिकल काॅलेज में अटैच कर उन्हें प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें कुछ मेडिकल काॅलेज के भी स्टाफ भी है। ये पूरी तरह ट्रैंड हो गए हैं। यदि काम शुरू हो जाता तो इनकी दक्षता भी बढ़ती और जांच में तेजी आती। अभी प्रशिक्षण लेने के बाद ये बैठे हुए हैं।

पूरे संभाग के सैंपल की अंबिकापुर में होगी जांच
अभी सैंपल लेने के अलावा ट्रांसपोर्टिंग में भी रोज खर्च हो रहा है। सैंपल लेकर कर्मचारी रायगढ़ जाते हैं। इसमें एक बार में 4 से 5 हजार रुपए खर्च हो रहा है। अंबिकापुर में जांच शुरू होने के बाद ट्रांसपोर्टिंग का खर्च बचेगा। बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया, जशपुर को भी ट्रांसपोर्टिंग में कम खर्च आएगा क्योंकि वे भी अभी रायगढ़ या बिलासपुर सैंपल भेजते हैं।

एक शिफ्ट में विशेषज्ञ सहित 15 स्टाफ की पड़ेगी जरूरत
वायराेलाॅजी लैब में माइक्रोबायोलाजिस्ट, साइंसटिस्ट, लैब टेक्नीशियन, कम्प्यूटर ऑपरेटर, अटेंडर, प्रोग्रामर, स्वीपर आदि के पद हैं। एक शिफ्ट में 8 लैब टेक्नीशियन, तीन कम्प्यूटर ऑपरेटर के अलावा विशेषज्ञ व साइंटिस्ट की जरूरत पड़ेगी। इस तरह हर शिफ्ट में यहां 15 स्टाफ काम करेंगे।

अभी आरटीपीसीआर सैंपल जांच के लिए जाता है रायगढ़
अंबिकापुर सहित दूसरे जिलों से आरटीपीसीआर सैंपल लेकर जांच के लिए रायगढ़ मेडिकल काॅलेज भेजा जा रहा है। यहां एक साथ काफी मात्रा में सैंपल जमा हो जा रहे हैं। सिर्फ सरगुजा के ही करीब 500 सैंपल यहां 27 जुलाई तक थे। इनकी जांच नहीं हो पाई थी। क्योंकि वहां वर्कलोड बढ़ रहा है, इसलिए इससे रिपोर्ट देर से आ रही है।

हमारी तैयारी पूरी है, किट के लिए कर रहे प्रबंध
वायराेलाॅजी लैब के लिए आईसीएमआर से आईडी व पासवर्ड मिल गया है लेकिन रैक्ड किट व कुछ केमिकल नहीं आया है। इसका पूरे प्रदेश में शार्टेज है। अब कुछ एजेंसियों से बात चल रही है। जैसे ही किट व केमिकल उपलब्ध हो जाएगा हमारी जांच शुरू हो जाएगी। जैसे-जैसे स्टाफ बढ़ेगा जांच में तेजी आएगी।
-डाॅ. रमनेश मूर्ति, एचओडी, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, मेडिकल कॉलेज, अंबिकापुर



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Corona not being examined in medical college, because labs do not have kits and chemicals


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