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Sunday, July 12, 2020

गोशाला में महिलाएं गोबर से बना रहीं राखी, रायपुर, दुर्ग, पाटन से भी मिले ऑर्डर

चीनी सामानों के बहिष्कार के बीच इस बार रक्षाबंधन में भाइयों की कलाई पर गोबर से बनी राखियां सजेगी। इन सुंदर और आकर्षक राखियों को जिला मुख्यालय के ग्राम भलेसर स्थित वेदमाता गाेशाला में तैयार किया जा रहा है। बता दें कि हर साल चीन से बनी राखियां लोगों के लिए आकर्षक का केंद्र होता है, लेकिन इस बार बाजार में चीन से आने वाली राखियों को लाेग खरीदने से परहेज कर रहे हैं।

यही कारण है कि जिले के गाेशालाअाें में गाेबर सहित अन्य संसाधनाें से राखियां तैयार की जा रही है। पहली बार गाेशाला में गोबर से राखियां बनाई जा रहीं। गाय के गोबर को मोती के आकार में बनाकर उसे रंग, बिरंगे धागे में लगाकर राखी तैयार की जा रही है। इसकी कीमत भी 15 से 60 रुपए तक है। अभी तक दो हजार राखी का ऑर्डर मिल चुका है।

रोज बना रहीं 150 से 200 राखियां, अब तक 2 हजार राखी का मिल चुका ऑर्डर
लोकल स्तर पर ज्यादा डिमांड, रोज 200 राखी बेच रहीं

जिला मुख्यालय सहित रायपुर व पाटन से राखी की डिमांड आ रही है। अभी तक दो हजार राखी का ऑर्डर मिल गया है। वहीं रोज 150 से 200 राखियां लोकल स्तर पर दुकानदार ले जा रहे हैं। गोशाला के सचिव सीताराम सोनी ने बताया कि इस बार रायपुर, पाटन, दुर्ग व महासमुंद के दुकानों से ऑर्डर मिल रहा है। गाेशाला में काम करने वाली कुम्हारपारा निवासी ईश्वरी जाेशी एवं नयापारा भलेसर निवासी संध्या सिन्हा द्वारा राखियाें का निर्माण किया जा रहा है। ये दोनों रोज 150 से 200 राखी बनाते हैं। गोबर से बनी राखियाें की कीमत 15 से 60 रुपए तक की है।

कछारडीह की महिलाएं भी बना रहीं स्वदेशी राखियां
भाई बहन का पर्व रक्षाबंधन 3 अगस्त को है। इस दिन बहने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध कर उसकी लंबी उम्र की कामना करती है। वहीं भाई अपनी बहन की हर स्तर से रक्षा करने का संकल्प लेता है। इस त्योहार को लेकर शहर सहित ग्रामीण अंचलों में रंग बिरंगी राखियों से बाजार सजने लगा है। इस बार बाजार में चाइना वाली राखियों से ज्यादा स्वदेशी राखियों की डिमांड रहेगी। बाजार में गोशाला में गोबर से बनी राखियां भी देखने को मिलेगी। वहीं सांकरा व कछारडीह की महिलाएं भी विभिन्न सामग्रियों का इस्तेमाल कर आकर्षक स्वदेशी राखियां बना रहीं।



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Women in Goshala are also making orders from Rakhi, Raipur, Durg, Patan made of cow dung


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