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Sunday, August 2, 2020

पुलिस की नौकरी में कई बार मजबूरों से वास्ता पड़ता था, चाहकर भी मदद नहीं कर पाया, 25 साल बाद समाजसेवा के लिए छोड़ दी नौकरी

(शिव कुमार बावा) पंजाब पुलिस में एएसआई रहे गांव बिंझों के जसपाल सिंह आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। समाजसेवा व जरूरतमंदाें की मदद के लिए उन्हाेंने 4 साल पहले पुलिस की नौकरी छोड़ दी। कहीं भी किसी गरीब व्यक्ति को देखते हैं, उसकी सहायता के लिए पहुंच जाते हैं। जसपाल सिंह 5 भाइयों में सबसे छोटे हैं। दो भाई पुलिस व एक भाई अमेरिका में रहता है जबकि जसपाल सिंह व एक अन्य भाई गांव में ही खेतीबाड़ी का काम करते हैं।
जसपाल सिंह की पत्नी हरप्रीत कौर भी पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर हैं और होशियारपुर महिला थाने में सेवारत हैं। जसपाल ने बताया कि भगवान की किरपा से उनके परिवार में किसी बात की कोई कमी नहीं है। उनका खेतीबाड़ी और प्रॉपर्टी का अच्छा कारोबार है। पुलिस की नौकरी करते समय बहुत से लोगों से बास्ता पड़ता था, जो बहुत ही मजबूर हालत में होते थे।

गरीब और जरूरतमंद लोगों की हालत देखकर वो चाहते हुए भी कोई मदद नहीं कर पाते थे। एक दिन उन्होंने समाजसेवा के लिए 25 साल सेवा देने के बाद पुलिस की नौकरी छोड़ दी। उस समय वह थानेदार थे।जसपाल सिंह ने बताया कि अब वह समाज सेवा को ही समर्पित है। वह नहीं चाहता कि कोई भी जरूरतमंद अपनी मंजिल तक पहुंचने में सिर्फ आर्थिक तंगी करके रह जाए।

सैलाखुर्द व सतनौर में 2 गरीबों को घर के लिए दिए ढाई-ढाई लाख

जसपाल सिंह ने गत दिवस सैला खुर्द में बिजली ऑफिस के आगे एक महिला जो बेहतद गरीबी में अपना जीवन बसर कर रही हैं और उनका बेटा व पति मानसिक परेशान हैं। उनके लिए जसपाल ने ढाई लाख रुपए मकान बनाने के लिए दिए। एक लाख रुपए का सामान भी फेंकवा दिया। इसी तरह गांव सतनौर की एक गरीब महिला जिसका कमाई का कोई साधन नहीं है। गांव के सरपंच सोम नाथ के कहने पर उक्त महिला को भी मकान बनाने के लिए ढाई लाख रुपए दिए।

करंट से झुलसे 2 बच्चों के इलाज का भी खर्च उठाया
गांव शेरगढ़ में एक गरीब बच्चा जिसे करंट लगा था, उसके इलाज व जीरकपुर में 14 साल के लड़के जो हादसे में अपनी टांगें गंवा चुका है, उसके इलाज का भी सारा खर्च उठा रहे हैं। जसपाल सिंह ने अपने गांव बिंझों में 10 लाख रुपए खर्च कर इलाके के मरीजों के लिए एक वैन व मोर्चरी के लिए एक एंबुलेंस दान की है। कोरोना महामारी दौरान करीब 1लाख 60 हजार रुपए का आटा बांटा। यही नहीं 27 के करीब ऐसे जरूरतमंद लड़के-लड़कियां हैं, जिनकी पढ़ाई का खर्च जसपाल सिंह उठा रहे हैं।



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Many times in the police job had to deal with the compulsions, could not help even though they wanted, left the job for social service after 25 years


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