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Sunday, August 2, 2020

गांव बोहण की 56 वर्षीय नंबरदारनी मंजीत कौर ने 40 साल बाद दोबारा शुरू की पढ़ाई, ओपन स्कूल से 69 प्रतिशत अंक लेकर पास की 12वीं की परीक्षा

पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती है। इस बात को सच साबित किया है गांव बोहण की 56 साल की नंबरदारनी मंजीत कौर ने। मंजीत कौर ओपन स्कूल से 12वीं कक्षा में 450 में से 312 अंक (69 प्रतिशत) हासिल कर महिलाओं व समाज के लिए मिसाल बनी हैं। वकौल मंजीत कौर जब कोर्ट परिसर में एक बुजुर्ग के साथ उसके वकील ने दुर्व्यवहार किया, तो उसका दिल चोटिल हुआ और उसने वकील बनकर बुजुर्ग लोगों के केस फ्री में लड़ने का इरादा कर लिया।

लेकिन, 10वीं कक्षा तक पढ़ाई और स्कूल छोड़े 40 साल के बाद पढ़ाई शुरू करना आप में बड़ी चुनौती लगी। लेकिन, समाजसेविका व राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित इंदरजीत नंदन ने मार्गदर्शन किया और आज 12वीं में 69 प्रतिशत अंक हासिल कर परीक्षा उत्तीर्ण करने में कामयाब हुईं । मंजीत कौर ने बताया कि देर रात तक बैठकर पढ़ना और सुबह जल्दी उठने के बाद पहले पाठ-पूजा और फिर किताब लेकर बैठ जाती थी।

राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित इंदरजीत नंदन ने मंजीत कौर का मार्गदर्शन किया, लॉ की पढ़ाई के लिए डीसी से मांगी है परमिशन

56 साल की मंजीत कौर ने बताया कि उनका मायका गांव कंदोला (आदमपुर) है। साल 1979 में उन्होंने गांव डरोली कलां के सरकारी स्कूल से थर्ड डिविजन में 10वीं पास की थी। उनके गांव से सिर्फ उनके साथ 2 अन्य लड़कियां ही स्कूल जाती थीं। 1980 में उसकी शादी गांव बोहण के दर्शन सिंह से हो गई। मंजीत कौर ने बताया कि वकील बनने का इरादा तो कर लिया, लेकिन किस तरह बनना है, कहां दाखिला लेना है इस बात से परेशान थी । इस पर वह समाज सेविका और राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित इंदरजीत नंदन के घर गई और उनको सारी बात बताई ।

उन्होंने 12वीं कक्षा के लिए ओपन स्कूल में दाखिला करवाया और उसको किताबे और सारा सिलेबस उपलब्ध करवा कर भी दिया। मंजीत कौर ने बताया कि वकील बनने के लिए 12वीं पास करना जरूरी था, जो उन्होंने कर ली। लेकिन, वकील की पढ़ाई शुरू करने के लिए उनको डीसी दफ्तर से मंजूरी लेनी होगी, जिसकी वजह है उनकी नंबरदारी। उन्होंने बताया कि वे 2016 से नंबरदारी कर रही हैं। अगर नंबरदार को वकील बनना है तो पहले डीसी की मंजूरी लेनी पड़ेगी। इसके लिए उन्होंने डीसी दफ्तर में बात की है, जहां से उनको मंजूरी देने की बात कही है।

कैंसर जैसी बीमारी को मात दे चुकी हैं मंजीत कौर
समाजसेवी इंदरजीत कौर नंदन ने बताया कि साल 2009 में मंजीत कौर के पति की बीमारी से मौत हो गई। साल 2007-2008 में मंजीत कौर को कैंसर का पता चला। उसका इलाज शुरू हुआ और आखिरकार उसने इस बीमारी को भी मात दे दी। अब वह अपनी पुश्तैनी खेतीबाड़ी देख रही है।

स्कूल में बच्चों के साथ बैठ कर करती थीं पढ़ाई : लेक्चरर मुनीश
बोहण के सरकारी स्कूल के लेक्चरर मुनीश कुमार ने बताया कि मंजीत कौर ने उनको स्कूल में बैठकर पढ़ाई करने की मंजूरी मांगी थी। उनका लक्ष्य और जज्बा देख उन्होंने सभी अध्यापकों के मीटिंग करने के बाद इसकी मंजूरी दे दी। मुनीश ने बताया मंजीत कौर ने कभी भी स्कूल में अपने नम्बरदार होने का दबाब नहीं डाला बल्कि स्कूल के स्टाफ का उन्होंने पूरा सहयोग दिया। मंजीत कौर इतनी मेहनती थीं कि सर्दियों में सुबह सुबह एक्स्ट्रा क्लास लगाने को पहले ही पहुंच जाती थीं। ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान भी उन्होंने कभी क्लास मिस नहीं की।



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56-year-old Numberdarni Manjeet Kaur of village Bohan resumed studies after 40 years, passed class XII examination with 69 percent marks from Open School


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