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Tuesday, August 18, 2020

राष्ट्रीय नेताओं तक पहुंची कार्यकर्ताओं की नाराजगी, हार के लिए ठहरा रहे जिम्मेदार

भाजपा के कार्यकर्ताओं की नाराजगी अब राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह और छत्तीसगढ़ प्रभारी डॉ. अनिल जैन तक पहुंच गई है। कार्यकर्ता खुलकर नेताओं के बारे में लिख रहे हैं। पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह के साथ इन्हें भी चुनाव में हार के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और नए सिरे से संगठन में नियुक्तियों की मांग करने लगे हैं।
वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद उपासने का बयान आने के बाद अब कार्यकर्ता और मुखर हो गए हैं। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर कार्यकर्ता अब खुलकर वरिष्ठ नेताओं के बारे में बयान दे रहे हैं। अब कार्यकर्ता ताराचंद साहू, वीरेंद्र पांडेय और स्व. केशव सिंह ठाकुर के साथ हुई घटनाओं के बारे में भी लिखने लगे हैं और कुछ नेताओं पर इनकी राजनीति खत्म करने का आरोप लगा रहे हैं। कार्यकर्ता यह तर्क दे रहे हैं कि ऐसे नेतृत्व का क्या फायदा जो जिलाध्यक्ष और प्रदेश कार्यकारिणी घोषित करने से घबरा रही है। एक पुराने नेता ने यह भी खुलासा किया है कि अपनी जीत के लिए कार्यकर्ताओं की भूमिका को नकारने वाले एक पूर्व विधायक को किस तरह 2018 के चुनाव में कार्यकर्ताओं ने 16 हजार वोटाें से हराया था। कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन को उनकी बात सुननी पड़ेगी।

उपासने की हार के पीछे साजिश
भाजपा से जुड़े कई वाट्सएप ग्रुप में उपासने के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग खड़े हो गए हैं। उपासने को पार्टी द्वारा टिकट देने और ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन का अध्यक्ष बनाने के बयान पर भी कार्यकर्ता नाराजगी जता रहे हैं। उनका कहना है कि उपासने ने यह बयान अपने लिए नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के लिए दिया है। एक वाट्सएप ग्रुप में यह खुलासा किया गया है कि महापौर के चुनाव में बैनर-पोस्टर बंटने से रोका गया। इसी तरह रायपुर उत्तर के चुनाव में भी उनके खिलाफ साजिश की गई थी।

कार्यकर्ता गरीब हुए, एकात्म परिसर के कर्मचारी भाईसाब
प्रदेशभर से कार्यकर्ता नेताओं के साथ-साथ एकात्म परिसर के कर्मचारियों पर भी सवाल उठा रहे हैं। एक कार्यकर्ता ने टिप्पणी की है कि 15 साल की सरकार में पार्टी के लिए काम करने वाले निचले स्तर के कार्यकर्ता गरीब ही रह गए, लेकिन एकात्म परिसर में काम करने वाले कर्मचारी अब भाईसाब हो गए हैं। कार्यकर्ताओं की नाराजगी कार्यालय का प्रबंधन देखने वाले कर्मचारियों को लेकर है, जिनकी वजह से वे राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री या संगठन महामंत्री से भी नहीं मिल पाते। इसे लेकर कई बार एकात्म परिसर और कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में भी विवाद की स्थिति बन चुकी है। पूर्व भी ऐसे कई कर्मचारी हावी रहे हैं, जिन्हें बाद में कार्यालय से हटाना पड़ा था। अब फिर से ऐसी ही स्थिति बन रही है।



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