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Wednesday, August 5, 2020

कैप्टन के खिलाफ दूसरी बार लुधियाना बना बगावत का केंद्र

इत्तफाक से सूबे में अकालियों से सत्ता छीनकर साल 2002 में कांग्रेस की ओर से बनाई सरकार के कैप्टन अमरिंदर सिंह ही फिलहाल मुख्यमंत्री हैं। तब और इस बार भी विपक्ष नहीं, बल्कि अपनों यानी कांग्रेसियों ने ही उनके खिलाफ मोर्चा खोला है। वे पिछली बार तत्कालीन कैबिनेट मंत्री हरनाम दास जौहर तो अब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रधान और राज्यसभा सदस्य शमशेर सिंह दूलों के निशाने पर हैं।

दोनों मर्तबा बगावत का केंद्र लुधियाना ही रहा, लेकिन मौजूदा वक्त जिले के ज्यादातर कांग्रेस नेता “वेट एंड वॉच’ पॉलिसी पर अमल कर रहे हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो पिछली बार मंत्री जौहर का मिशन-बगावत कामयाब नहीं हो सका था। लिहाजा इस बार असंतुष्ट कांग्रेसी नेता, सांसद दूलों के साथ आने के मामले में जल्दबाजी नहीं करना चाह रहे।

सिर्फ हाईकमान कहे तो सब कुछ छोड़ने को तैयार : दूलों
जहरीली शराब के मामले को ही मुद्दा बना बगावत पर आमदा शमशेर सिंह दूलों ने दोहराया कि कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ उनसे जवाब-तलब करने की बजाय नैतिक जिम्मेदारी निभाएं। बोले कि हां, अगर कांग्रेस सुप्रीमो के कहने पर वह सबकुछ छोड़ सकते हैं। उनके आंकलन पर ही वह राज्यसभा पहुंचे।

पार्टी में सबकी बात सुनी जानी चाहिए : पांडे
छह बार विधायक बनने वाले पूर्व मंत्री राकेश पांडे की पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल से नजदीकी जगजाहिर है। वह दूलों प्रकरण को लेकर बेबाकी से बोले कि पार्टी में सबकी बात सुनी जानी चाहिए। सबके अपने ख्यालात होते हैं और कम्युनिकेशन-गैप से ही माहौल बिगड़ता है।

डावर बोले, ये सीनियर लीडरशिप का मामला
सूत्रों की मानें तो विधायक सुरिंदर डावर इस बार कोई पोर्टफोलियो न मिलने के कारण खुश तो नहीं हैं, लेकिन खुलकर बोलना भी नहीं चाहते। लिहाजा वह इस मामले में भी विवादों से बचते हुए पल्ला झाड़ बोल कि यह तो सीनियर लीडरशिप का मामला है।

पार्टी प्लेटफार्म पर बात करनी चाहिए थी : दाखा
पूर्व सीएम बेअंत सिंह के करीबी पूर्व मंत्री मलकीत सिंह दाखा भी मौके की नजाकत के हिसाब से बोले। वह काफी समय साइड-लाइन रहे, लेकिन अब जिला प्लानिंग बोर्ड के चेयरमैन हैं। लिहाजा नपे-तुले अंदाज में सलाह दी कि किसी भी नेता-वर्कर को अपनी बात पार्टी प्लेटफार्म पर ही रखनी चाहिए।

मामला हमारे दायरे में नहीं आता : अश्वनी
दूलों-प्रकरण संगठनात्मक स्तर का विवाद है और उसकी जड़ें शहर में ही हैं, लेकिन संगठन में निचले स्तर पर कोई प्रतिक्रिया को राजी नहीं है। कांग्रेस जिला प्रधान अश्वनी शर्मा ने तो इस विवाद से बचते हुए कहा कि इस पर वह टिप्पणी नहीं करेंगे, क्योंकि मामला उनके दायरे में नहीं आता है। भले ही इस विवाद का सीधा असर जिले की राजनीति पर देखने को मिलेगा, ऐसा सियासी जानकारों का मानना है।



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