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Sunday, September 20, 2020

सिविल अस्पताल की 10 से 25 साल पुरानी मांगें पूरी हुईं, चार आईसीयू, लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस, ऑक्सीजन प्लांट मिला

(प्रभमीत सिंह) जिले में अब तक 316 लोगों की जान ले चुके कोरोना वायरस ने बहुत कुछ बदला है। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जिसे कोरोना ने प्रभावित नहीं किया। जान-माल के नुकसान के रूप में नकारात्मक बहुत कुछ है लेकिन पिछले पांच महीने में जिला अस्पताल को अपने ऑक्सीजन सिलेंडर, हाईटेक एंबुलेंस और एचएफएनओ मशीनरी के रूप में ऐसे मेडिकल इक्विपमेंट मिले हैं।

पांच महीने में सिविल अस्पताल की 10 से 25 साल पुरानी मांगें पूरी हुई हैं। 1 करोड़ रुपए से अधिक के मेडिकल इक्विपमेंट और अन्य मेडिकल उपकरणों की खरीद हुई है। सांसद की मदद से फुल इक्विप्ड हाईटेक एंबुलेंस मिल गई है। लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस से कई मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।
दो महीने में अस्पताल में जो सबसे बड़ा बदलाव आया है, वह यह कि रातोंरात 28 बेड का आईसीयू मिल गया है। सिविल अस्पताल को कोविड केयर सेंटर में तब्दील कर दिया गया है। यहां पिछले 3 महीने से केवल कोरोना वायरस के लेवल- 2 और 3 के मरीजों का इलाज किया जा रहा है। सिविल अस्पताल में पहले 24 बेड का आईसीयू था।

कोरोनावायरस के बढ़ रहे गंभीर मरीजों के कारण अस्पताल के फीमेल सर्जिकल वार्ड को कुछ ही दिनों के अंदर अंदर लेवल -2 और लेवल 3 के मरीजों के इलाज के लिए आईसीयू में तब्दील किया गया है। वर्तमान समय मे अस्पताल में कुल 4 आईसीयू हैं। जिनमें फिबिलेटर, मोनिटर, फ्लोरिड बेड और एसी आदि मौजूद है।

ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ने पर किया गया प्रबंध

सिविल अस्पताल में 360 के करीब बेड हैं। 25 साल से अस्पताल में अपने ऑक्सीजन सिलेंडर तक नहीं थे। वहीं अब वर्तमान समय अस्पताल के पास अपने 360 बड़े और 300 से अधिक छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर है। इसके अलावा कोरोनावायरस के बढ़ रहे गंभीर मरीजों और अस्पताल में हो रही ऑक्सीजन की ज्यादा खपत के कारण अस्पताल में अब अस्पताल में ऑक्सीजन जेनरेटिंग प्लांट को भी मंजूरी मिल गई है।

एचएफएनओ मशीन से 20 से अधिक मरीजों की जान बची

सिविल अस्पताल को हाई फ्लो नेसल केनुला मशीनें मिली हैं। वेंटिलेटर से पहले मरीज को हाई फ्लो मशीन के जरिए संक्रमित फेफड़ों को तेजी से ऑक्सीजन पहुंचती है। इससे मरीज जल्दी रिकवर कर रहा है। वहीं यह मशीन एक मिनट में 45 लीटर ऑक्सीजन की खपत करती है। एचएफएनओ मशीन के जरिए अब तक 20 से अधिक सीरियस मरीजों की जान बचाई जा चुकी है। अस्पताल में अभी 4 एचएफएनओ मशीनें स्थापित की गई हैं।

तुरंत होगी ऑक्सीजन सप्लाई

कोरोनावायरस से पहले अस्पताल में 150 बेड सेंट्रल ऑक्सीजन पाइपलाइन के साथ युक्त थे। जिला प्रशासन की तरफ से अस्पताल में कोविड-19 के गंभीर मरीजों के लिए अब अस्पताल में 240 बेड पर सेंट्रल ऑक्सीजन पाइपलाइन को जोड़ा गया है। वहीं, अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडरों के लिए ग्राउंड फ्लोर पाइप लाइन में ऑक्सीजन भेजने के लिए मेनीफोल्ड को तैयार किया गया है। जहां एक समय में एक 16 साथ ऑक्सीजन सिलेंडर गैस पहुंचा सकेंगे। पहले दर्जा-4 कर्मचारियों और ऑक्सीजन कंपनियों के कारिंदे लिफ्ट और सीढ़ियों के जरिए सिलेंडर दूसरी और तीसरी मंजिल तक लेकर जाते थे।

कोविड-19 के मरीजों के लिए डायलिसिस वार्ड
वर्तमान समय में अस्पताल में जो मरीज किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं और उन्हें कोरोना की पुष्टि हुई है, उनके लिए अस्पताल में अलग से डायलिसिस वार्ड तैयार किया गया है। नॉन कोविड मरीजों के लिए प्राइवेट अस्पताल के साथ करार किया गया है। जहां उनका फ्री में डायलिसिस होता है। इसके लिए आपको अस्पताल में रेफर लेना जरूरी है। प्राइवेट अस्पताल में डायलिसिस के लिए अस्पताल प्रशासन फीस देगा।

इन जरूरतों को अभी भी पूरा करना बाकी
पिछले 5 महीने में सिविल अस्पताल में जिला प्रशासन और पंजाब हेल्थ सिस्टम कार्पोरेशन की तरफ से अस्पताल में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए हैं। हालांकि अस्पताल में जहां इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरा किया गया है। वहीं, अस्पताल में अभी भी मेडिकल स्पेशलिस्ट और एनेस्थिसिया के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के अलावा स्टाफ नर्सों और दर्जा-4 कर्मचारियों की कमी है। जिसे आने वाले दिनो में पूरा करने की काफी जरूरत है।

कोरोनाकाल में आए अन्य बदलाव
1. एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस।
2. वाशिंग प्लांट के बाद अब अस्पताल में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की तैयारी।
3. अस्पताल में 4 आईसीयू तैयार किए गए हैं। इनमें ट्रॉमा, मेडिकल, कोविड-19 और गायनी विभाग का अलग से आईसीयू तैयार है।
4. फॉरेंसिक विभाग के लिए मॉर्चरी सेंटर को भी नए सिरे से तैयार करने की तैयारी।
5. अस्पताल के आईसीयू रनिंग कंडीशन में आए।
6. कोरोना वार्ड और अन्य वार्डों में नए बेड, नए गद्दे बिछाए गए।



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10 to 25 years old demands of civil hospital met, four ICUs, life support ambulance, oxygen plant found


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