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Wednesday, September 9, 2020

पुलिस ने 11 माह में शुरू किए 30 बड़े प्रोजेक्ट, 60% दस्तावेजों तक सीमित, बाकी शुरू होने के बाद बंद

पुलिस डिपार्टमेंट ने पिछले कुछ महीनों में कई प्रोजेक्ट शुरू हैं। मगर इसमें ज्यादातर सीमित हैं। कई प्रोजेक्ट शुरू होने के कुछ दिन बाद ही किसी कारणवश बंद हो गए। इनमें से ज्यादातर प्रोजेक्ट पब्लिक से सीधे तौर पर जुड़े हैं। पुलिस ने 11 महीने में करीब 30 बड़े प्रोजेक्टों की शुरुआत की गई थी। इसमें से 60% तो दस्तावेजों तक ही सीमित रह गए।

वहीं, कई शुरू होने के बाद कुछ दिन में ही बंद हो गए। पुलिस अफसरों ने जोर-शोर से इन कार्यों को शुरू करने का ऐलान किया था, लेकिन बंद हो गए। इनमें से कुछ प्रोजेक्ट तो कोरोनाकाल के दौरान शुरू हुए। इसमें ऑनलाइन पुलिस सिस्टम, ऑनलाइन शिकायतें समेत कई चीजें शामिल रही, ताकि लोगों को थाने आने से रोक घरों में बैठे उनके काम किए जा सके। मगर थोड़े दिन तो यह काम चला, फिर बंद हो गया। वहीं, डीजीपी ने सभी जांच अफसरों को घटनास्थल पर ले जाने के लिए इन्वेस्टिगेशन बैग भी दिए थे, जोकि आजतक किसी भी घटनास्थल पर मुलाजिमों के पास नहीं दिखे।

शहर में ट्रैफिक के सुधार को लेकर चलाया एक भी प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया
शहर में जाम की समस्या के हल को पुलिस बड़े दावे करती रही है। ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने को अक्टूबर 2019 में ट्रैफिक पुलिस ने सड़कों पर खड़े वाहनों के खिलाफ एंटी इंक्रोचमेंट ड्राइव चलाने की शुरुआत की। मगर वह चली ही नहीं। दिसंबर में घरों, फैक्ट्रियों और किसी भी इमारत के आगे रॉन्ग पार्क किए वाहन की फोटो खींच पुलिस एप पर भेज उसका चालान कराने का प्रोजेक्ट लाया गया, जोकि नहीं चल पाया।

135 ट्रैफिक मार्शल महिलाओं को लाया गया, परंतु हफ्ते बाद वह भी नहीं दिखी। सितंबर में चार पॉइंट ढोलेवाल, जनकपुरी, चीमा चौक और ट्रांसपोर्ट नगर का रूट प्लान तैयार कर यहां से रास्ते निकालने का प्लान बनाया। एक हफ्ता प्लान चलने के बाद फिर से स्थिति पहले जैसे हो गई। जबकि ट्रैफिक मुलाजिमों की शर्ट पर कैमरे लगाए गए, फिर 15 दिन बाद उतार लिए।

भीड़ पर नजर रखने को उड़ाए ड्रोन 2 दिन बाद ही बंद
पुलिस ने कोरोनाकाल में भी प्लान बनाए। मार्च में वॉलंटियर्स को गलियों में भेजकर लोगों को जागरूक करने का प्लान बना। वॉलंटियर जरूर आए, मगर गलियों में कोई भी नहीं गया। अप्रैल में ड्रोन के जरिए भीड़ पर नजर रखने और कार्रवाई के लिए ड्रोन उड़े। मगर दो दिन बाद बंद हो गए। इसके अलावा मरीजों को डॉक्टर के साथ घरों से लेकर आने को 40 मुलाजिमों की कोविड कमांडो टीम तैयार हुई।

मगर काम नहीं आई। इसके अलावा राशन को लेकर ऑनलाइन सिस्टम शुरू किए, जोकि फेल हो गए। इसके अलावा पीड़ितों को बड़े मामलों में थाने बुलाने का सिस्टम शुरू हुआ। मगर फिर हर कोई थाने आ जा सकता है। राशन का समान होम डिलीवरी होने का काम भी रह गया।

क्राइम कंट्रोल को चलाए प्रोजेक्ट, मुलाजिमों की जगह सड़क पर सिर्फ बैरिकेड
सितंबर में शहर में खराब हुए 600 कैमरे ठीक करने के लिए अफसरों ने रिपोर्ट मांगी। मगर अभी तक उसे ठीक नहीं कराया जा सका। नवंबर 2019 में शहर में क्राइम कंट्रोल करने के लिए रोज 400 मुलाजिम नाइट ड्यूटी और 50 से अधिक नाके लगाने का दावा किया गया। मगर एक महीने बाद सड़कों पर सिर्फ बैरिकेड या 5-6 मुलाजिम ही दिखाई दिए।

मार्च में पीजी में हर किसी के व्यक्ति आकर रहने के चलते उनकी वेरिफिकेशन कराने के आदेश दिए। मगर एक भी थाने की पुलिस ने उसे अपनी कार्यशैली में नहीं तब्दील किया। इसी तरह इलाकों में पीसीआर गश्त करने के प्लान बनने के बाद भी नहीं पूरे हुए।

पूरा सिस्टम ऑनलाइन, कंप्लेंट रिसीव न होने से पीड़ित परेशान

खुद को हाईटेक कर पुलिस ने अपना सिस्टम ऑनलाइन किया गया। इसमें अपराधियों की सीआईए में हाजिरी लगाने को पंचिंग मशीन लगाने का प्रोजेक्ट लाया गया। मगर वह अभी तक नहीं चला। फिर ऑनलाइन शिकायतें देने पर कार्रवाई होने के आदेश हुए। जबकि पीड़ित उनकी शिकायतें रिसीव न होने की बात कहते हैं। फिर ट्रैफिक-कोविड नियम तोड़ने वालों की फोटो सोशल मीडिया पर डालने का प्लान लाया गया।

  • सभी प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है। शहर में दोबारा सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। कोरोना के चलते कई प्रोजेक्ट रुक गए थे। अब सभी को एक-एक कर शुरू किया जा रहा है। हर प्रोजेक्ट में अलग-अलग नोडल अफसर बनाए गए हैं। -जंग बहादुर, एसीपी, हेडक्वार्टर


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30 big projects started by police in 11 months, 60% limited to documents, rest closed after commencement


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