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Sunday, September 13, 2020

सिर चढ़कर बोली शराब, तीन महीने में सिविल अस्पताल में कटीं 2000 एमएलआर, इनमें 1600 से ज्यादा नशे में झगड़े की

(प्रभमीत सिंह) कोरोनाकाल के दौरान मारपीट और सिविल अस्पताल में कटने वाली मेडिकल लीगल रिपोर्ट (एमएलआर) के ट्रेंड में भी बड़ा बदलाव सामने आया। लॉकडाउन के शुरुआती दिनों यानी अप्रैल में जहां 222 एमएलआर कटीं वहीं अगस्त में अनलॉक होने पर इनकी संख्या बढ़कर 713 हो गई। तीन महीने में 68 फीसदी एमएलआर बढ़ गईं। सिविल अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार 80 फीसदी मामलों में ज्यादा शराब पीने के बाद झगड़े हुए और नौबत मारपीट तक जा पहुंची।

करीब 60 फीसदी मामलों में लोग खुद को चोटिल कर फर्जी एमएलआर कटवाने पहुंचे। ऐसे लोग एमएलआर कटवाने के लिए डॉक्टरों पर दबाव डाल नेताओं से फोन करवाते हैं। मई में 50 फीसदी, जून में 48% और जुलाई में 74% एमएलआर ज्यादा रहीं। जिले में पांच महीने में 2604 एमएलआर काटी गईं।

पत्नी के जख्मी होने के बाद खुद को चोटिल कर एमएलआर कटवाने पहुंचे

सिविल अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि 70 फीसदी मामले 7 बजे के बाद आ रहे हैं। शहर में भार्गव कैंप, अली मोहल्ला और किशनपुरा के इलाकों से ज्यादा मामले आए हैं। कई मामलों में आपसी रंजिश के कारण झगड़े हुए। नकोदर और करतारपुर से भी ज्यादा मामले सिविल अस्पताल के डॉक्टरों के पास आ रहे हैं। इमरजेंसी के इंचार्ज डॉ. राजकुमार का कहना है कि लॉकडाउन के बाद एमएलसी के मामलों में खासा इजाफा हुआ।

वहीं, 80 फीसदी मामलों में लोग शराब के नशे में लड़ रहे हैं। हालांकि इन मामलों में सबसे रोचक बात यह है कि 50 फीसदी से ज्यादा लोगों ने पहले घर के बाहर दोस्तों के साथ बाहर बैठकर शराब पी। इसके बाद किसी ने घर जाकर अपनी पत्नी के साथ मारपीट की, किसी ने पड़ोसी के साथ। ऐसे भी केस आए जिनमें दोस्तों ने एक साथ शराब पी और बाद में आपस में भिड़ गए। मारपीट के बाद लोग एक-दूसरे के खिलाफ पर्चा कटवा रहे हैं।

लूटपाट के मामलों में लोगों के सिर और बाजू पर ज्यादा वार

अस्पताल में 3-4 मामले लूटपाट में घायल होने वालों के आ रहे हैं। ज्यादातर मामले सिर और बाजू पर वार के हैं। घरेलू कलेह में मारपीट के केस भी बढ़े हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में पत्नी और घर की अन्य महिलाओं के साथ व्यक्ति की तरफ से बदसलूकी की जाती है। 20-30 फीसदी केस में पत्नियों को जख्मी करने के बाद पति खुद को चोटिल कर अस्पताल पहुंचे।

डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग सेल्फ इंजरी करके यानी खुद को जख्मी कर अस्पताल में पहुंच रहे हैं और झूठी रिपोर्ट बनाने का दबाव डालते हैं। मना करने पर नेताओं के फोन करवाने लगते हैं। कई मामलों में ब्लंट इंजरी के केस भी आते हैं। मरीज के अस्पताल पहुंचने पर दूसरे पक्ष द्वारा हमला करने के केस भी बढ़ रहे हैं।

कई बार डाउटफुल इंजरी लिखना पड़ता है: डॉ. बद्धन

सिविल अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल अफसरों के इंचार्ज डॉ. राजकुमार बद्धन का कहना है कि जब कोई मरीज सेल्फ इंजरी करके आता है तो उसकी चोट देखकर ही पता चल जाता है कि चोट झगड़े के दौरान लगी है या नहीं। कई बार व्यक्ति खुद आकर बताता है कि उसे 4 लोगों ने पीटा लेकिन न उसके कपड़े फटे होते हैं और न शरीर पर चोट के निशान होते हैं। एमएलआर काटने से मना करने पर लोग बहस करने लगते हैं। कुछ मामलों में लोग बाजुओं पर तेजधार हथियारों से कट लगाकर आते हैं। संदिग्ध मामलों में डॉक्टर इंजरी के साथ मेडिकल भाषा में डाउटफुल इंजरी लिख देते हैं।



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