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Sunday, September 20, 2020

कॉरपोरेट सेक्टर में जाने के बाद ट्यूबवेलों पर मिल रही मुफ्त बिजली व गरीबों को हर माह मिलने वाली 300 यूनिट सब्सिडी खत्म हो जाएगी

केन्द्र सरकार की ओर से पास किए गए 3 अध्यादेशों को लेकर पंजाब के किसानों मे रोष बढ़ता ही जा रहा है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के गांव बादल की रिहायश के बाहर चल रहे किसानों के धरने में हर रोज किसानों की गिनती बढ़ती जा रही है। इस धरने में महिलाएं व नौजवान वर्ग बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहा है। हालांकि पुलिस द्वारा भी सुरक्षा के पूरे प्रबंध किए गए हैं।

रविवार को 6वें दिन शामिल हुए धरने में भी करीब 3000 किसान शामिल होकर केन्द्र सरकार के खेती ऑर्डिनेंसाें के खिलाफ अपना विरोध जताया। सबसे बड़ी बात यह है कि इस धरने में अपने भविष्य को लेकर चिंतित नौजवान व किसान ट्रैक्टर, ट्रॉलियों व अन्य अपने साधनों पर बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।

25 सितंबर को 30 किसान संगठनों द्वारा पंजाब बंद को सफल बनाने के लिए व 24 से 26 सितंबर तक रेल रोको आंदोलन के लिए पूरे मालवा में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। रविवार को लंबी क्षेत्र के अलावा, मुक्तसर, बठिंडा, फरीदकोट, मोगा, मानसा जिलों के सैकड़ों गांवों में मोदी सरकार की अर्थियां फूंकी गई।

वक्ताओं ने केन्द्र मंत्री हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अध्यादेशों को रद करवाने तक संघर्ष जारी रहेगा।

बादल गांव के धरने में किसी भी सियासी नेता को बोलने की इजाजत नहीं

बादल गांव में चल रहे धरने में बोलते हुए भाकियू नेता शिंगारा सिंह मान, जिला महासचिव गुरभगत सिंह भलाईआना ने बताया कि गांव बादल में चल रहा यह धरना निरोल किसानों का धरना है। किसानों के आंदोलन का पूरा प्रबंध, रात्रि को रूकने का प्रबंध व लंगर का प्रबंध किसानों द्वारा खुद ही किया जाता है। इस धरने को किसी भी सियासी पार्टी की न तो हिमायत है और न ही किसी भी सियासी पार्टी से संबंधित नेता को स्टेज पर बोलने की ईजाजत दी जाती है। गत दिवस आम आदमी पार्टी के हरपाल सिंह चीमा स्टेज पर आने या बोलने से मना कर दिया था।
बिजली सब्सिडी की सुविधा छीनना चाहती है सरकार

नए बिजली एक्ट के विरोध करते हुए उक्त किसान नेताओं ने बताया कि नए बिजली एक्ट 2020 में केन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों से बिजली देने के अधिकार छीनकर अपने हाथ में ले लिए हैं। अब नए बिजली एक्ट 2020 आने पर बिजली उत्पादन कॉपोरेट सेक्टर व विदेशी कंपनियों के हाथों में चला जाएगा इसके बाद किसानों को ट्यूबवेलों पर मिल रही मुफ्त बिजली व गरीबों को हर माह मिलने वाले 300 यूनिट की सब्सिडी भी खत्म हो जाएगी। बिजली सब्सिडी की सुविधाएं सरकार छीनना चाहती है।



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बादल गांव में दिन-रात के धरने में बैठे किसानों के लिए लंगर वितरित करते हुए किसान यूनियन के नेता
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने लगाए बैरिकेड
After going to the corporate sector, the free electricity received on tubewells and 300 units subsidy to the poor every month will end.


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