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Tuesday, September 8, 2020

लेवल वन से थ्री के मरीजों को रैफर करने से पहले होगी जांच

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रदेश उपप्रधान व जिला प्रधान डा. विकास छाबड़ा ने बताया कि कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए जिले के विभिन्न प्राइवेट अस्पतालों में स्टेज तीन व चार वाले मरीजों को दाखिल कर इलाज की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। जिसमें जिले के 8 प्राइवेट अस्पतालों में कोविड मरीजों की इलाज की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इनमें आदेश अस्पताल, मैक्स अस्पताल, दिल्ली हार्ट इंस्टीच्यूट, इंद्राणी अस्पताल, निवारण अस्पताल, सत्यम अस्पताल, ग्लोबल अस्पताल, प्रैग्मा अस्पताल में स्टेज दो से चार तक के मरीजों का उपचार शुरू कर दिया गया है।

उन्होंने बताया किया कि जरूरत पड़ने पर आईएमए द्वारा अन्य अस्पतालों में भी स्टेज अनुसार बैड की व्यवस्था की जाएगी। इसी तरह उन्होंने स्टेज वन में मरीजों को फोन व ऑनलाइन गाइडेंस देने व होम क्वारंटाइन व आइसोलेट हुए मरीजों को ऑनलाइन इलाज सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए 18 माहिर डाक्टरों का एक पैनल गठित किया है। दूसरी तरफ अब प्रदेश में लेवल वन से लेवल टू या थ्री के अस्पताल में रेफर होने वाले कोरोना संक्रमित मरीजों को रेफरल प्रोटोकाल के तहत रेफर किया जाएगा।

गंभीर मरीज को रेफर किए जाने की सूरत में एंबुलेंस से लेकर अस्पताल पहुंचने तक उसकी केस हिस्ट्री के हिसाब से उपचार के सभी इंतजाम पहले से होंगे। सूबे में कोविड की वजह से हुई मौतों के बारे में करवाए ऑडिट में यह तथ्य सामने आया कि ज्यादातर मरीज ऐसे थे जोकि इतनी गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचे कि उनकी हालात में सुधार नहीं हो पाया। मरीजों को रैफर करने से पहले नोडल अफसर इलाज संबंधी पूरी जानकारी प्राप्त करेंगे।
लेवल-2 : जिस मरीज को बुखार, खांसी और कोरोना के अन्य लक्षण हों। ज्यादा लक्षण आने पर तुरंत ऑक्सीजन और इलाज जरूरी है।
लेवल-3 : किडनी, दिल और अन्य बीमारियों से ग्रस्त रोगी, जिनकी उम्र 60 साल से ज्यादा हो। इन्हें लेवल-3 में गिना जाता है। ऐसे मरीजों को आईसीयू- ऑक्सीजन, हार्ट बीट, पल्स रेट और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है।
जिले में प्रतिदिन 1000 से ज्यादा सैंपल लेने का टारगेट तय है। इसका उद्देश्य कैरियर स्टेज के मरीजों की पहचान करना है। मेडिकल एक्सपर्ट बताते हैं कि वर्तमान में यह नहीं पता कि किस व्यक्ति को कोरोना वायरस है। इसके चलते रेपिड टेस्टों की भी संख्या बढ़ाई गई है।

ऑक्सीजन लेवल 90 प्रतिशत से कम है तो हाई लेवल सुविधा जरूरी
जिला टीकाकरण अफसर डाक्टर कुंदन कुमार ने बताया कि जिन मरीजों का ऑक्सीजन लेवल 90 प्रतिशत से कम है या सांस लेने में परेशानी है। उन्हें हाई लेवल सुविधा अनिवार्य है। जिनकी पल्स रेट 120 से कम न हो, ब्लड प्रेशर ठीक न हो, यूरीन में कमी, ज्यादा बुखार, व्हाइट सेल में कमी, थकावट महसूस कर रहे मरीजों को क्लीनिकल जजमेंट के आधार और डॉक्टर की राय के बाद लेवल थ्री के अस्पताल की सुविधा देने का प्रावधान है।

मरीजों के उपचार से जुड़े स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया गया है जिसमें वह गंभीर स्थिति में पहुंचे मरीजों के उपचार को लेकर विचार विमर्श कर सकेंगे। इसमें इस बात को भी सुनिश्चत किया जा सकेगा कि मरीज को किस स्तर पर दूसरे अस्पतालों में रैफर किया जाना है।



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