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Friday, September 11, 2020

कोयला संकट से जूझ रहे एसईसीएल बिश्रामपुर को दो नई खदानों से उम्मीदें

एसईसीएल जल्द ही दो नई खदानों को शुरू करने जा रहा है। वन विभाग की अनुमति मिलने के बाद केतकी भूमिगत खदान को अगले साल जनवरी महीने में शुरू किया जाएगा। यह नई तकनीकी की खदान होगी। इसके अलावा अमगांव खदान को भी अगले महीने से शुरू करने की योजना है। इसके लिए जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया है। आमगांव खदान में 465 ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा। यह दोनों ही खदानों से 25 साल तक कोयले का उत्पादन होगा।
मालूम हो कि पहले से चल रही केतकी अंडरग्राउंड माइंस और अमागांव ओपन खदान में अधिग्रहीत क्षेत्र से कोयले का स्टॉक खत्म होने के बाद यह खदानें बंद चल रही थीं। इसके बाद इन खदानों को विस्तार करने की प्रक्रिया शुरू की गई। लेकिन, केतकी खदान के विस्तार में वन विभाग की जमीन होने के कारण अनुमति नहीं मिल सकी। हाल ही में केतकी खदान को फिर से शुरू करने के लिए वन विभाग ने अनुमति दे दी है। यह खदान पांच हेक्टेयर के क्षेत्रफल में चलेगी। इसी तरह अमगांव खदान के क्षेत्र को बढ़ाने में आड़े आ रही परेशानियों को दूर कर लिया गया है। यहां पटना और कोट गांव की जमीन के अधिग्रहण का काम पूरा हो गया है। यहां अगले महीने से कोयले का उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। पटना गांव की 931 एकड़ जमीन देने के लिए ग्रामीण राजी हो गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित ग्रामीणों को कोल इंडिया पालिसी 2012 के तहत नौकरी एवं पुनर्वास की सुविधा मिलेगी।

20 से 25 साल तक चलेंगी खदानें
केतकी अंडरग्राउंड और आमगांव ओपन खदान 20 से 25 सालों तक चलेंगीं। जीएम बीएन झा ने बताया कि केतकी में जी-5 और जी-6 कैटेगरी का कोयला उपलब्ध है। केतकी खदान शुरुआत में चार से सवा चार लाख टन हर साल कोयला का उत्पादन करेगी। जबकि चार से पांच साल बाद इस खदान से लगभग नौ लाख टन कोयले का उत्पादन होगा। वन विभाग की पूरी जमीन होने के कारण अभी किसी ग्रामीण को रोजगार नहीं दिया गया है। खदान शुरू होने के बाद ही रोजगार मिल सकेगा। इसी तरह आमगांव कोल माइंस में 28 मिलियन टन कोल का भंडारण है। यहां पटना और कोट गांव की जमीन का अधिग्रहण कर 465 ग्रामीणों को रोजगार दिया गया है।

78 हजार टन लक्ष्य से दूर
कोयला उत्पादन के विकराल संकट से जूझ रहे एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र का अस्तित्व खतरे में है। बीते कई वित्तीय वर्षों से क्षेत्र करोड़ों के घाटे में चल रहा है। चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में बिश्रामपुर क्षेत्र का वार्षिक उत्पादन लक्ष्य 26 लाख 20 हजार टन निर्धारित किया गया है, जिसके एवज में एक अप्रैल से सात जुलाई तक बिश्रामपुर क्षेत्र को दो लाख 16 हजार 968 टन कोयला उत्पादन करना था। उसके एवज में क्षेत्र मात्र एक लाख 39 हजार 90 टन कोयला ही उत्पादन कर सका। बीते चार माह में ही क्षेत्र अपने निर्धारित उत्पादन लक्ष्य से 77878 टन पीछे है।

जल्द शुरू होंगी दोनों खदानें:जीएम बीएन झा ने बताया कि दोनों खदानों को जल्द ही शुरू किया जाएगा। खदानों के विस्तार में आ रही परेशानियों को दूर कर लिया गया है। अमगांव खदान अगले महीने से उत्पादन शुरू कर देगी। इसके अलावा केतकी खदान में जनवरी महीने से उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। केतकी खदान उत्पादन के मामले में क्षेत्र की सबसे बड़ी खदान बनेगी।



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SECL Bishrampur struggling with coal crisis, hopes for two new mines


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