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Saturday, September 19, 2020

जब सीबीआई के पास था मामला तब सैनी पंजाब पुलिस से जांच की मांग करते थे, अब पंजाब पुलिस जांच कर रही तो सीबीआई से जांच चाहते हैं

(सुखबीर सिंह बाजवा) यह कहानी सुमेध सिंह सैनी की है। सैनी 1982 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और पंजाब के डीजीपी रहे हैं। लेकिन इन दिनों वे बलवंत सिंह मुल्तानी किडनैपिंग एंड मर्डर केस का सामना कर रहे हैं। वे पंजाब पुलिस के पहले डीजीपी हैं जिन पर 28 साल बाद किसी केस में सीधे तौर पर कत्ल का आरोप लगा है। ये वो आईपीएस अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने पंजाब में आतंकवाद के विरुद्ध विशेष योजना के तहत काम किया। बड़े-बड़े आतंकियों और अपराधियों को धूल चटा दी।

सैनी पंजाब में आतंकवादियों के साथ लोहा लेने वाले सुपरकॉप डीजीपी रहे केपीएस गिल के राइट हैंड माने जाते रहे हैं। आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैठे बड़े आतंकवादी और गैंगस्टर उनके नाम से खौफ खाते हैं। विभिन्न अफसरों और राजनेताओं के विरुद्ध काम करते हुए वे अक्सर विवादों में रहे हैं। इसलिए इनकी गिनती सुपरकॉप के रूप में होती रही है। यहां तक कि एक समय में वे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ केस दर्ज करने से भी पीछे नहीं हटे हैं।

लेकिन अब पिछले कुछ दिनों में उन पर पंजाब पुलिस का कुछ इस तरह शिकंजा कस गया है कि उन्हें छिपकर अग्रिम जमानत लेनी पड़ी। उनको इन दिनों दो मामलों- सैनी मोटर केस में तीन लोगों का लापता होना और पूर्व आईएएस अधिकारी दर्शन सिंह मुल्तानी के बेटे जेई बलवंत सिंह मुल्तानी के किडनैपिंग और मर्डर केस का सामना करना पड़ रहा है।

2002 में जब कैप्टन सरकार सत्ता में थी तो सैनी आईजी इंटेलिजेंस होते थे। तब पंजाब लोक सेवा आयोग के चेयरमैन रवि सिद्धू को पकड़ने में इनकी अहम भूमिका रही। सिद्धू पर पीसीएस अधिकारियों के भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोप लगे। उनके लॉकरों 10 करोड़ रुपए कैश मिला था। यह मामला देश के चर्चित मामलों में से एक था।

कैप्टन सरकार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर बादल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था। जिसके कारण दोनों को कुछ दिन के लिए जेल भी जाना पड़ा था। उसके बाद 2007 में जब अकाली-भाजपा सरकार सत्ता में आई तो सैनी ने बादल परिवार की इस केस से बाहर निकलने में काफी मदद की थी। इसलिए इनकी बादल परिवार के साथ नजदीकियां बढ़ गई और कैप्टन से दूरिया बन गई।

कैप्टन के खिलाफ मामला दर्ज करने में सैनी की भूमिका थी

बादल सरकार के दौरान ही कैप्टन के खिलाफ सिटी सेंटर घोटाला मामला दर्ज करने में भी सैनी की अहम भूमिका रही थी। पूर्व डीजीपी एसएस विर्क के खिलाफ भी आय से अधिक संपत्ति मामले में भी सैनी की ही रणनीति रही थी। इसी के चलते विर्क को अदालत का सहारा लेना पड़ा था और अदालत ने सरकार को इसके लिए फटकार लगाई, क्योंकि जांच में उनके खिलाफ ऐसा मामला नहीं पाया गया था।
विर्क के खिलाफ मामले के चलते उनके बेटे प्रदीप विर्क, जो उस समय आईपीएस सिलेक्ट हो गए थे और उन्हें मणिपुर काडर मिला, तब वे पिता के खिलाफ कार्रवाई से इतने आहत हुए कि उन्होंने आईपीएस बनना छोड़कर वकालत करना शुरू कर दिया।

मुल्तानी के मामले में भी सैनी पर चल रहा मामला

अब मुल्तानी केस में भी वे एडवोकेट हैं। 1994 में जब सैनी लुधियाना में एसएसपी थे, तब सैनी मोटर केस में अशोक कुमार, विनोद कुमार और ड्राइवर मुख्यितार सिंह लापता हो गए थे। इसी केस में भी सैनी की भूमिका मामला चल रहा है। जिसकी सीबीआई जांच करी रही है। 2008 में मुल्तानी केस आया, तब यह मामला सीबीआई के पास था। उस वक्त सैनी ने कहा कि मामला पंजाब पुलिस के पास होना चाहिए लेकिन अब जब यह मामला पंजाब पुलिस हैंडल कर रही है तो सैनी का कहना था कि इस केस को सीबीआई को देखना चाहिए।

गोलीकांड में भी कस सकता है शिकंजा

अब बेशक बीते मंगलवार को उन्हें मुल्तानी किडनैपिंग एंड मर्डर केस में सुप्रीमकोर्ट से दो हफ्ते के लिए राहत मिल गई हैं, लेकिन उनकी मुश्किलें कम होनी वाली दिखाई नहीं दे रही हैं, क्योंकि बहबलकलां गोलीकांड केस भी उनके सिर पर मंडरा रहा है। इस मामले में भी पुलिस उनकी गिरफ्तारी को लेकर उन पर शिकंजा कस सकती है। क्योंकि मामले की एसआईटी जांच में इस बात का खुलासा कर चुकी है कि आईजी उमरानंगल और सैनी के आदेशानुसार ही घटनास्थल पर गोली चली औ वहां दो लोग मारे गए।

इसलिए अब पंजाब सरकार इस मामले में भी सैनी के खिलाफ कार्रवाई तेज कर देगी। पूर्व डीजीपी विर्क के बेटे प्रदीप विर्क जो कि वकील है, और अन्य कानूनी माहिरों ने भी मुल्तानी केस में सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि बलवंत सिंह मुल्तानी आतंकी था, तो उस पर कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई क्यों नहीं की गई और अगर वह बेगुनाह था, तो उस पर कार्रवाई क्यों की गई।



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पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी (फाइल फोटो)


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