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Friday, September 25, 2020

बंद को समर्थन, बाजार नहीं खुले, किसानों का सड़कों पर प्रदर्शन, कृषि विधेयकों के खिलाफ गुरदासपुर; दीनानगर और बटाला में किसानों ने दिए शांतिपूर्ण धरने

केंद्र सरकार की की तरफ से पास किए गए कृषि विधेयकों के विरोध में किसानों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा। शुक्रवार को किसान संगठनों की ओर से दी गई पंजाब बंद की कॉल का गुरदासपुर, बटाला दीनानगर में पूरा असर देखने को मिला।

शहर के बाजार सारा दिन पूरी तरह से बंद रहे। वहीं, दीनानगर कादियां, कलानौर, डेरा बाबा नानक, श्री हरगोबिंदपुर में किसानों ने रोड जाम कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान लंगर का भी पूरा प्रबंध किया गया था। गुरदासपुर में सुबह 10 बजे से दोपहर ढाई बजे तक धरे चले। वहीं बटाला में शाम 4 बजे तक धरने चले।

उधर, शिरोमणि अकाली दल की ओर से जिला प्रधान गुरबचन सिंह बब्बेहाली के नेतृत्व में ट्रैक्टर रैली निकालने के बाद बब्बरी बाइपास पर चक्का जाम किया गया। किसानों के धरने को समर्थन देने के लिए यूथ कांग्रेस के जिला प्रधान व मिल्क प्लांट गुरदासपुर के चेयरमैन बलजीत सिंह पाहड़ा और लेबरसैल पंजाब के चेयरमैन गुरमीत सिंह पाहड़ा भी धरने में शामिल हुए।

वहीं धरनों में कोरोना नियमों का पालन नाममात्र ही देखने को मिला। बब्बरी बाइपास पर शिअद के धरने को संबोधित करते जिला प्रधान बब्बेहाली ने कहा कि केंद्र की आंखें खोलने के लिए प्रदेश भर में धरने लगाए गए हैं। किसानों के हक में जो भी कुर्बानी देनी पड़ी दी जाएगी। एडवोकेट पाहड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पारित किए गए विधेयक पूरी तरह से किसान विरोधी हैं।


बटाला के गांधी चौक पर बड़ी संख्या में धरने पर बैठे किसान, धरने में बहुत कम किसानों ने मास्क पहने हुए थे।

कोरोना से बेखौफ न ही मास्क और न ही दिखी सोशल डिस्टेंसिंग

धरने-प्रदर्शन में न ही किसानों ने मास्क लगाया और न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया। जब इस बारे में एक किसान से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनके बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए अगर उन्हें अपनी जान की कुर्बानी भी देनी पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगे।

उन्होंने कहा कि देश का प्रधानमंत्री एक परिवार के मुखिया के समान होता है जब वह मुखिया ही पक्षपात करते हुए उनकी जरूरतों तथा मांगों को नजरअंदाज करता रहे तो ऐसे में उनके लिए मास्क या समाजिक दूरी जरूरी नहीं है। आज उन्हें खतरा महामारी से नहीं इन काले कानूनों से है।


बटाला के गांधी चौक में लंगर बांटते हुए।

किसान बोले-केंद्र सरकार फसलों के समर्थन मूल्य को खत्म करने पर तुली

काहनूवान चौक में किसानों ने चक्का जाम कर धरना लगाया। किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में खेती बिल पास कर लोकतंत्र की हत्या की है। बिजली संशोधन बिल-2020 के तहत किसानों को फ्री मिलने वाली बिजली की सुविधा खत्म कर दी गई है।

रैली को संबोधित करते मक्खन सिंह कोहाड़, बलबीर सिंह रंधावा, अजीत सिंह हुंदल, सुखदेव सिंह भागोकावां, जम्हूरी अधिकार सभा के डा. जगजीवन, अश्विनी कुमार आदि ने कहा कि केंद्र सरकार देश को तबाह करने पर तुली हुई है। किसान विरोधी बिलों से फसल का समर्थन मूल्य खत्म कर दिया गया है। बिलों के माध्यम से किसानों की जमीनें छीनकर बड़ी कंपनियों को देने की चाल चली जा रही है।


आज गुरदासपुर-अमृतसर रेलवे लाइन पर धरना लगाएंगे किसान

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेतृत्व में किसानों ने पुराना बस अड्‌डा चौक में धरना लगाकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। किसान नेता रणबीर सिंह डुगरी, सुखदेव सिंह, बख्शीश सिंह सुल्तानी आदि ने बताया कि शनिवार को किसान गुरदासपुर-अमृतसर रेलवे लाइन पर धरना लगाएंगे।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने नई खेती कानून थोप दिए हैं, जिससे किसान तबाह हो जाएंगे। पहले ही किसान खुदकुशियों के दौर से गुजर रहे हैं। नए खेती बिलों से हर वर्ग को कठिनाई होगी। इसलिए सभी वर्गों को एक साथ मिल कर इन किसान विरोधी विधेयकों के खिलाफ प्रदर्शन करना चाहिए।



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ट्रैक्टरों से बंद किया गया अमृतसर-पठानकोट नेशनल हाइवे।


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