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Saturday, September 26, 2020

सड़कों से उठकर रेलवे ट्रैक पर बैठे किसान एक ही मांग-केंद्र वापस ले कृषि विधेयक

केंद्र सरकार के कृषि विधेयकों का विरोध शनिवार को भी जारी रहा। शुक्रवार को किसानों ने काहनूवान चौक में धरना लगाकर चक्का जाम किया था, वहीं शनिवार को किसान सैकंडों की संख्या में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के बैनर तले काहनूवान रोड स्थित अमृतसर-जम्मू रेलवे ट्रैक पर जा बैठे। धरने में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं।

उन्होंने केंद्र सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार किसानी को खत्म करने पर तुली हुई है। केंद्र सरकार जब तक खेती बिलों को वापस नहीं लेती उनका संघर्ष इसी तरह से जारी रहेगा। धरने का नेतृत्व गुरप्रीत सिंह खानपुर, गुरप्रताप सिंह और रणबीर सिंह डुगरी ने किया।
इस मौके पर कमेटी के प्रदेश नेता सविंदर सिंह, कुलबीर सिंह, सोहन सिंह और रछपाल सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने संसद में कृषि विधेयक धक्के के साथ पास करवाए है। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ कानूनी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पंजाब सहित हरियाणा और अन्य राज्यों के किसानों व मजदूरों में इन विधेयकों को लेकर रोष है। 25 सितंबर के पंजाब बंद से ही सरकार को समझ लेना चाहिए था कि देशभर में रोष पनप रहा है। किसान नेताओं ने कहा कि राष्ट्रपति को किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए इन बिलों पर फिर से विचार करना चाहिए।

कृषि विधेयक लागू होने से किसानों के साथ-साथ आम लोगों के लिए रसोई चलाना मुश्किल होगा
किसान नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों पर नए खेती कानून थोप दिए हैं, जो कि किसानी को खत्म करने की चाल है। नए बिल लागू होने से किसानों के अलावा हर वर्ग के लोगों के लिए रसोई का खर्च चलना मुश्किल हो जाएगा। मंडी फीस ने मंडी बोर्ड को हर साल चार हजार करोड़ रुपए की आमदन होती है, जिससे गांवों की सड़कों, गलियों-नालियों का काम होता है लेकिन आमदन न होने के कारण सभी काम ठप हो जाएंगे। एमएसपी पर सरकारी खरीद की गारंटी खत्म होने जा रही है। किसानों की फसल निजी कंपनियों की ओर से कांट्रेक्ट फार्मिंग के तहत खरीदी जाएगी।

ऐसे में कंपनियां मनमाने दाम पर किसानों की फसल खरीदेंगी। किसानों की जमीनें हड़प ली जाएंगी। इसके चलते इन कानूनों का विरोध करने के लिए किसानों को रेलवे ट्रैक पर धरना लगाकर बैठना पड़ रहा है। इस मौके पर हरविंदर सिंह, बख्शीश सिंह, सुखदेव सिंह, जसबीर सिंह, हरदीप सिंह, प्रेम सिंह, मनजिंदर सिंह, सुखविंदर सिंह, हरविंदर सिंह, गुरविंदर सिंह, सुरजीत सिंह, राममूर्ति, गुरविंदर सिंह बाजवा आदि मौजूद थे।

केंद्र के कृषि विधेयक के कारण पंजाब के किसानों को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा : इंद्र सेखड़ी
बटाला | किसान बचाओगे तो पंजाब बचेगा। यह बात शिअद के प्रदेश उपाध्यक्ष इंद्र सेखड़ी ने कही। उन्होंने कहा कि इस समय हर किसी को किसानों का समर्थन करना चाहिए। किसानों की मांग को पूरा करवाने के लिए शिअद प्रधान सुखबीर बादल ने पार्टी कार्यकर्ताओं को पूरे पंजाब में विरोध प्रदर्शन करने का निर्देश दिया है। पार्टी किसानों के साथ खड़ी है और खड़ी रहेगी। किसान परिवारों के लिए हर बलिदान देने को तैयार है।

सेखड़ी ने कहा कि अकाली दल ने मांग की है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे की खरीद को आपराधिक अपराध बनाया जाए। वर्तमान मंडी प्रणाली को जारी रखना चाहिए। किसानों को कॉर्पोरेट सेक्टर के सहारे पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। सेखड़ी ने कहा कि हम एमएसएमई उद्योग की रक्षा करने में पहले विफल रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा माल ढुलाई नीति को वापस ले लिया गया था। इसने पंजाब में इस्पात उद्योग को अपंग बना दिया है। अकाली दल किसानों से खिलवाड़ नहीं होने देगा।

मांग : फसल खरीद की गारंटी दी जाए
धरने में किसान नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार को अपने वादे के अनुसार स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करना चाहिए। गेहूं, धान का खरीद मूल्य जारी कर खरीद की गारंटी दी जाए। गन्ने के बकाया 681 करोड़ रुपए की राशि जारी की जाए और डीजल-पेट्रोल की कीमतों को कम किया जाए। जेलों में बंद लेखकों व बुद्धिजीवियों को रिहा किया जाए। मजदूरों के बिलों के बकाया खत्म किए जाए और बिजली संशोधन एक्ट 2020 को रद्द किया जाए।



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Farmers sitting on railway tracks after getting off the roads withdraw the same demand-center Agriculture Bill


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