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Wednesday, September 30, 2020

वकीलों ने डीसी ऑफिस के बाहर केंद्र के खिलाफ किया प्रदर्शन, बोले-कृषि बिलों के खिलाफ जाएंगे सुप्रीम कोर्ट

केंद्र सरकार के खेती बिलों के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों को लगातार समर्थन मिलना जारी है। इसी कड़ी में बुधवार को जिला बार कौंसिल भी किसानों के समर्थन में उतर आई है। बार कौंसिल से जुड़े वकीलों ने डीबीए पार्किंग से खेती बिलों के विरोध में रोष मार्च करने के बाद डीसी ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते खेती बिलों को काला कानून बताते विरोध दर्ज कराया गया।

इस दौरान डीबीए के प्रतिनिधियों ने डीसी मोहम्मद इश्फाक को देश के राष्ट्रपति के नाम पर ज्ञापन भी सौंपा गया। कौंसिल के सदस्यों ने कहा कि खेती बिल पूरी तरह से किसान विरोधी हैं, इसके चलते उन्हें भी किसानों के समर्थन में उतरना पड़ा है। रोष मार्च के दौरान वकीलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कौंसिल के पदाधिकारियों ने खेती बिलों के खिलाफ लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की घोषणा की है।

डीसी को सौंपे ज्ञापन में डीबीए के पदाधिकारियों ने कहा कि बार एसोसिएशन के 500 सदस्य पूरी तरह से केंद्र सरकार के खेती बिलों का विरोध करते हैं। इन कानूनों को पूरी तरह से अलोकतांत्रिक तरीके से पास किया गया है। इन कानूनों का रोजगार, गरीबी और जीडीपी पर प्रभाव पड़ेगा। इसलिए बार कौंसिल पूरी तरह से इनका विरोध करती है।

कॉरपोरेट घरानों को सौंपा जा रहा सब कुछ : प्रधान सुखविंदर सिंह सैनी

डीबीए के प्रधान सुखविंदर सिंह सैनी ने कहा कि सब कुछ कॉरपोरेट घरानों को सौंपा जा रहा है। इतिहास गवाह है कि देश में पहले भी काले कानून बनते रहे हैं, लेकिन जब भी लोग लामबंद हो जाते हैं, तो इन्हें वापस लेना पड़ा है। कृषि बिल पास कर किसानों के साथ धक्केशाही करने का प्रयास किया जा रहा है, इसके चलते किसानों को मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ा है।

कौंसिल के 80 फीसदी वकील किसानी से जुड़े हुए हैं। जब तक केंद्र सरकार ये कानून वापस नहीं लेती, तब तक किसानों का साथ दिया जाएगा। बार कौंसिल किसान संगठनों के संपर्क में है। इस लड़ाई में कानून का सहारा लेना पड़ेगा। अगर इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक भी जाना पड़ा तो जाया जाएगा। केंद्र सरकार के खेती बिलों को वापिस लेना चाहिए।

आढ़ती-मजदूरों पर भी होगा बिल का असर: रविंदर कुमार

कौंसिल के पूर्व उप प्रधान रविंदर कुमार ने कहा कि यह केवल किसानों से जुड़ा मसला नहीं है। सभी इसके साथ जुड़े हुए हैं। मंडीकरण खत्म होने से 30 हजार आढ़ती और तीन लाख मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे। आज पंजाब के मालवा इलाके में किसानों की जो खुदकुशियां देखने को मिलती हैं, वे माझा में भी सामने आने लगेंगी। सरकार तक संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया है कि वे इन काले कानूनों को तुरंत वापस ले।

यहां उप प्रधान कविराज सैनी, सचिव अमितपाल महाजन, कैशियर बिक्रमजीत सिंह खैहरा, ज्वाइंट सेक्रेटरी जगनदीप सिंह, एडवोकेट साहिल कंबोज, एडवोकेट जतिंदर सिंह गिल, एडवोकेट राकेश कुमार, एडवोकेट नरिंदर कुमार, एडवोकेट मुनीष कुमार, एडवोकेट पंकज तिवारी, एडवोकेट इंद्रजीत, एडवोकेट एसएस धालीवाल आदि मौजूद थे।

लोकतंत्र में जनता शक्तिशाली : काहलों
कौंसिल के पूर्व प्रधान एडवोकेट सुखविंदर सिंह काहलों ने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही शक्तिशाली होती है, जो सरकारों को झुका देती है। केंद्र सरकार जब तक कानून वापस नहीं लेती, तब तक ऐसे ही प्रदर्शन चलते रहेंगे। वकील किसानों का समर्थन करते हैं और हमेशा करते ही रहेंगे। देश का किसान आज अपने हकों के प्रति पूरी तरह से सचेत है। हम भी किसानों के बेटे हैं, उनका दिया ही खाते हैं। इसलिए किसानों के पक्ष में हमेशा आवाज बुलंद करते रहेंगे।



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Lawyers protest against center outside DC office, says Supreme court will go against agricultural bills


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