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Tuesday, September 8, 2020

हथियारों के बल पर शहर में हो रही वारदातें, दो लोगों की मौत हो चुकी, दो जख्मी

(चंदन ठाकुर) भीड़ से कुछ अलग दिखने की चाह हर किसी युवा को होती है, लेकिन इसके लिए जिले में युवा वर्ग जुर्म के गलत रास्ते पर चलकर भविष्य को बर्बाद करने में लगे हैं। पिछले कुछ माह में दबंग दिखने के चक्कर में हथियार रखने का शौक लगातार बढ़ रहा है। इसी का नतीजा है कि जिले में पिछले कुछ दिनों से हत्या जैसे संगीन अपराध तेजी से बढ़े हैं, वहीं दूसरी ओर उक्त वारदातों को लेकर पुलिस भी काफी गंभीर व सचेत है, ऐसे में पुलिस लगातार कार्रवाई करते हुए हत्यारों को हवालात भेज रही है।

सूत्रों की माने तो आपराधिक प्रवृत्ति के अलावा युवा वर्ग पर्दे की चकाचौंध से प्रभावित हो रहा है। फिल्मों में अपने पसंदीदा हीरो को पिस्तौल लेकर भीड़-भाड़ में चलते देखकर स्वयं को दबंग व अलग दिखाने की चाह में अवैध हथियार का प्रचलन भी बढ़ रही है जो शहर के युवाओं के लिए घातक साबित हो रहा है।

असलहे के साथ प्रदर्शन भी अपराध फिर भी सोशल मीडिया में हथियारों के साथ वायरल कर रहे अपनी फोटो

शहर की बात करें तो हथियारों के शौक में दो युवाओं की जान चली गई। जिसमें पहला मामला परस राम नगर के ललित शर्मा उर्फ लक्की पंडित से जुड़ा है। लक्की को गाेलियां मारकर मौत के घाट उतारने वाले कोई गैंगस्टर नहीं थे बल्कि 20-25 साल के युवा हैं। जिन्होंने हथियारों से अंधाधुंध गोलियां चलाई और एक 30 साल के ललित की जान चली गई।

हालांकि इस केस में मुख्य चेहरा लाली फरार है, जिसे जल्द पकड़ने का पुलिस दावा कर रही है। लक्की को भी हथियारों का शौक था तथा उसने भी सोशल मीडिया में राइफलों के साथ कई तस्वीरें पोस्ट कर रखी हैं। दूसरा मामला तीन दिन पहले हुए यूथ अकाली दल के उपप्रधान सुखनप्रीत संधू की मौत से जुड़ा है। 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेसियों पर फायरिंग करने के आरोप में उस पर इरादा कत्ल का केस दर्ज किया था।

उसके बाद से ही संधू ने अपने साथ हर समय पिस्तौल रखना शुरू कर दिया। उसकी सोशल मीडिया प्रोफाइल में कई ऐसी तस्वीरें है जिसमें वह कई हथियारों के साथ प्रदर्शन कर रहा है। जिस दिन उसकी हत्या हुई उस दिन भी वह अपने साथ पिस्तौल लेकर गया था। हालात ऐसे बने कि उसी पिस्तौल ने उसकी जान ले ली। अगर वह पिस्तौल साथ लेकर न जाता तो शायद आज जिंदा होता। तीसरा मामला 15 दिन पहले गांव गिलपत्ती का है, जहां एक व्यक्ति से कार छीनकर फरार हो रहे लुटेरों ने गांव के ही एक युवक पर फायर कर दिया।

घटना में युवक के पैर पर गोली लगने से उसकी जान बच गई। उक्त युवक ने गांव के युवक का बचाव किया था। चौथा मामला सितंबर महीने में 100 फीट रोड का है। जहां दिनदहाड़े एक प्लाट पर कब्जे को लेकर चली अंधाधुंध गोलियों की गूंज लोग भूले नहीं हैं। टेक्नोलॉजी के इस जमाने में सोशल मीडिया का युवा वर्ग सदुपयोग के साथ-साथ दुरुपयोग भी कर रहे हैं।

जिसका नतीजा बहुत बुरा निकल रहा है। अवैध या वैध हथियारों की बात करें तो बहुत से युवा अपनी फोटो अवैध या वैध हथियारों के साथ सोशल साइटों पर वायरल कर देते हैं, लेकिन हथियारों के साथ फोटो डालकर प्रदर्शन करना भी अपराध की श्रेणी में आता है। पिछले कुछ समय से ऐसे मामले सामने आए हैं जो कि समाज के लिए चिंता का विषय है।

गीतों के बोल भी हिंसा बढ़ाने में रोल अदा कर रहे
पंजाबी गीतों में भरे ‘गोली’ व ‘हथियारों’ जैसे शब्द युवाओं को उत्तेजित कर रहे हैं या उनमें गुस्से की ‘आग’ भर रहे हैं। परिणाम स्वरूप शादी-विवाह या अन्य अवसरों पर हवाई फायरिंग या लड़ाई-झगड़ों के मामलों में जान तक जाने की नौबत आ जा रही है। पंजाबी गायकों के गाए गीतों पर हिंसा को बढ़ावा, असलहा के प्रयोग व मारपीट का अधिक फिल्मांकन किया जा रहा है।

इतना ही नहीं गायकों के गीतों के बोल भी हिंसा को बढ़ाने में अहम रोल अदा कर रहे हैं।बब्बू मान के सुपर हिट रहे ‘गीत चक्क लो रिवाल्वर रफलां’, ‘दिलजीत दोसांझ के गीत मितरां नू शौक गोलियां चलाउन दा’, ‘दिलप्रीत ढिल्लों के गुंडे नंबर वन’, ‘तेरे विच्च बोले बिल्लो 32 बोर दा’, ‘कुलबीर ¨झझर चक्क असलाह’ जैसे गीतों को युवाओं ने जमकर कर पसंद किया।

ये गीत टीवी चैनलों के अलावा स्टेज शो में प्रमुखता से चलाए गए। समागमों के दौरान चलने वाले इन गीतों को सुनकर युवा उत्तेजित हो कर हवाई फायर भी कर रहे हैं। इसका खामियाजा कई बार दूल्हे या दुल्हन के परिवार के अलावा समागम में आए मेहमानों व अन्य को अपनी जान गंवा कर चुकाना पड़ता है। कुछ यही दुखद स्थिति कुछ दिन पहले बठिंडा में आयोजित समागम के दौरान स्टेज पर डांस कर रही डांसर की मौत होने से पेश आई।

एक्सपर्ट व्यू : असलहे के क्रेज के लिए भड़काऊ गीत हैं जिम्मेदार
युवाओं में बढ़ रहे असलहे के क्रेज के लिए हथियारों पर आ रहे गीत जिम्मेदार हैं। दूसरी तरफ परिवार के लोग भी बराबर के जिम्मेदार हैं जो अपने बच्चों को हथियार रखने की शह दे रहे हैं। पंजाबी गीतों में भरे ‘गोली’ व ‘हथियारों’ जैसे शब्द युवाओं को उत्तेजित कर रहे हैं या उनमें गुस्से की ‘आग’ भर रहे हैं। ज्यादातर वारदातें नशे की हालत में होती हैं। युवा नशे का सेवन करते हैं और हथियारों का दुरुपयोग करने लगे हैं जिससे अक्सर किसी न किसी की जान जा रही है। डा. अरूण बांसल, मनोचिकित्सक, सरकारी अस्पताल



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Incidents taking place in the city on the strength of weapons, two people died, two injured


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