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Tuesday, September 8, 2020

तहसील कॉम्प्लेक्स के दफ्तरों में जूते पॉलिश कर रहे बच्चे, भीख मांग रहीं महिलाएं और मासूम

बालश्रम को रोकने के सरकारी दावों की पोल तहसील परिसर में बूट पॉलिश करते बच्चों ने खोल दी है। ये बच्चे दाे जून की रोटी के लिए सुबह से शाम तक पॉलिश करवा लो साहब... की आवाजें लगाते देखे जा सकते हैं। वहीं कई बच्चे भीख मांगते हुए भी परिसर में नजर आते हैं। मगर महिला बाल एवं विकास विभाग के अधीन डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट की टीम को इसकी खबर तक नहीं है।

बच्चे चौराहों, गलियों या सड़कों पर तो दूर सरकारी दफ्तरों में ही भीख मांग रहे हैं, जहां उनकी सुरक्षा के लिए आदेश-निर्देश भी जारी हुआ करते हैं। रजिस्ट्री दफ्तरों के अंदर 4-5 बच्चे जूता पॉलिश कर रहे हैं, लेकिन यहां भी न तो कोई चेकिंग की जाती न ही सुरक्षाकर्मियों या कर्मचारियों को इस तरह के कामों को रोकने के लिए सख्त हिदायतें दी हैं। वहीं कुछ महिलाएं भी छोटे बच्चों के साथ भीख मांगकर यहां लोगों को परेशान करती हैं।

बीते साल 273 बच्चों को भेजा गया था शेल्टर होम
बताते चलें कि लॉकडाउन के पहले मई 2019 से दिसंबर तक कुल 273 मामलों में बाल सुरक्षा विभाग की टीम ने कार्रवाई की थी। जिनमें बच्चों के परिवार का पता नहीं लगने पर उनको शेल्टर होम में शिफ्ट कराया गया था।
अच्छी सैलरी पर काम करते हैं कर्मचारी: चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट के कॉट्रेक्ट बेस पर काम कर रहे कर्मचारियों की बात करें तो बेहतर कामों के लिए अच्छी सैलरी पे की जाती है। लेकिन कर्मचारियों का हाल यह है कि उनको इस बात की जानकारी ही नहीं रहती कि उन्होंने क्या काम किया है। यहां दफ्तर में जब लॉकडाउन के बाद बच्चों के भीख मांगने और जगह-जगह कूड़ा उठाने व जूता पॉलिश करने जैसे मामलों को लेकर जानकारी मांगी गई तो कोई डेटा मेंटेन नहीं होने की बात कही गई।

चिल्ड्रन शेल्टर होम नहीं: शहर में चिल्ड्रन शेल्टर होम नहीं होने के कारण अधिकारियों को दूसरे जिलों में भेजना पड़ता है। जिसमें कई तरह की परेशानियां आती हैं। इसमें बच्चों को दूसरे जिलों के शेल्टर होम में पहुंचाने के लिए स्कॉट टीम की ड्यूटी लगानी होती है। बच्चों को दूर ले जाने में यह भी डर रहता है कि रास्ते में भाग न जाए। यदि यहीं रुकने की व्यवस्था हो तो समय और बच्चे के लिए टीम भेजने जैसी समस्याएं खत्म हो जाए। बच्चों को जालंधर, होशियारपुर, लुधियाना में बने शेल्टर होम में भेजना पड़ता है।

टीम को रेड मारने के निर्देश: डीपीओ
टीम को शहर में रेड मारने और बच्चों को शेल्टर होम में शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी दफ्तरों में यदि बच्चे भीख मांग रहे या फिर कोई और काम कर रहे हैं तो यहां भी टीम पहुंचेगी और कार्रवाई करेगी। -मनजिंदर सिंह, डीपीओ

जांच में बच्चे मिले तो भेजेंगे चाइल्ड लाइन:एसडीएम
तहसील कॉम्पलेक्स में बच्चों के भीख मांगने और कुछ अन्य काम करने की शिकायत पहली बार मिली है। वयस्क लोगों के गलत कामों की सूचना पर प्रशासन ने छापेमारी की थी और सभी को बाहर किया जा चुका है। मामले की चेकिंग करेंगे और यदि कोई बच्चा मिला तो उनको चाइल्ड लाइन भेज दिया जाएगा। -विकास हीरा, एसडीएम



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रजिस्ट्री दफ्तर के बाहर भीख मांगने वाली महिलाएं बच्चों के साथ।


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