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Monday, October 26, 2020

31 दिनों में तीन और बच्चे किए किडनैप हाथ-पैर जला मंगवाता था भीख, काबू, 24 सितंबर को बच्चा मिलने पर आरोपी को मंदबुद्धी बता छोड़ा, केस किया बंद

लुधियाना पुलिस ने शहर में बच्चे किडनैप कर उनके हाथ-पांव जलाकर भीख मंगवाने वाले एक किडनैपर को काबू किया है। आरोपी के पास से बरामद हुए दो बच्चों के हाथ व पांव चले हुए हैं। जबकि एक लापता बच्चे विकास(4) को बरामद करना बाकी है। आरोपी की पहचान मोती नगर 100 फुट रोड की फुटपाथ पर रहने वाले कृष्णा के रूप में हुई है। बरामद किए बच्चे महावीर कॉलोनी से मुनीश कुमार(4) और फोकल पाॅइंट का गोलू(8) है। जांच में पता चला कि पुलिस ने 24 सितंबर को जीवन नगर से किडनैप हुए विक्रम कुमार(9) को बरामद कर आरोपी कृष्णा को काबू किया था।

लेकिन विक्रम के पिता राम साहनी अनुसार उसे पुलिस ने एक दिन बाद मानसिक रोगी बता छोड़ दिया था। अब उसी किडनैपर ने 31 दिनों में तीन और बच्चे किडनैप कर लिए थे। जिन्हें वह जालकर, मारपीट करके, भूखे पेट व कई तरह से प्रताड़ित कर भीख मंगवाता था। जाॅइंट कमिश्नर कंवरदीप कौर ने बताया कि पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपी को काबू कर लिया।

पटाखों का लालच दे करता था किडनैप
आरोपी रेहड़े पर पटाखे रखकर इलाकों में घूमकर शिकार ढूंढता था। जहां पर उसे बच्चे गली में खेलते दिखते थे, तो वह वहां पर रोजाना चक्कर लगाकर नजर रखता था। जैसे ही गली में कोई व्यक्ति न होता तो एक बच्चे को पटाखों का लालच देता। बच्चे के मना करने पर उसे घुमाने समेत कई तरह की बातें कर अपनी बातों में फंसा लेता। फिर उन्हें ले जाकर भीख मंगवाता था।

जबकि उन्हें डराकर रखने को हाथ पांव जला देता। वह रोजाना भीख मांगने के पांच रुपए देता था। फिर अगले शिकार के लिए पहले बच्चे को साथ लेकर जाता। ताकि दूसरा बच्चा उसे देख जल्द बात मान जाए।

अंकल रोज पीटते थे, खाने को भी नहीं देते थे

मैं गली में खेल रहा था। तभी अंकल रेहड़ा लेकर आए। मुझे कई सारे पटाखे दिए। फिर बोले आजा रेहड़े पर घुमाता हूं। मैं रेहड़े पर बैठ गया। मुझे घुमाते रहे। मैंने घर जाने को कहा तो बोले बस अभी घर ले जाता हूं। फिर मुझे एक जगह ले जाकर सड़क पर बैठा दिया। खाने को दिया। मुझे और पटाखे दिए। मुझे मम्मी की याद आती थी, मैंने अंकल को कहा घर छोड़ दो, मगर वे मम्मी पापा वहीं पर आने की बात कहते रहे।

अंकल मुझे साथ लेटाकर गली में बैठे रहे। वहां एक और बच्चा गोलू(8) भी आया। फिर मुझे कहा जल्दी घर जाएंगे। अगले दिन पांव पर जला दिया और गोलू का हाथ जला दिया। मेरे से चला न जाए तो थप्पड़ मारते थे। फिर मुझे सड़क पर कटोरी देकर बैठा दिया। अंकल खाने को कभी नहीं देते थे, रोता था, फिर भी नहीं देते थे। हर समय थप्पड़ मारते थे। -जैसा मुनीष ने बताया।

पैरलेल इनवेस्टिगेशन

मेरे सामने आरोपी से मिला बच्चा, दिखाया रास्ता भूल गया था

मेरे तीन बच्चे हैं। विक्रम(9) मझला है। वह 20 सितंबर को लापता हो गया था। मैंने पुलिस को सूचित किया। मगर कार्रवाई नहीं की। फिर एक विधायक के समक्ष पेश होने पर थाना फोकल पाॅइंट पुलिस ने अज्ञात पर मामला दर्ज किया। पड़ोस में फैक्ट्री के बाहर लगे कैमरे में आरोपी की फुटेज आई। 24 सितंबर की दोपहर गांव मंगली जा रहे थे। रास्ते में एक रेहड़ा चालक बच्चा लेकर जाते दिखा। रेहड़े पर विक्रम बैठा था। उक्त आरोपी को पुलिस पकड़कर थाने ले आई। अगले दिन बच्चे की सेहत खराब होने पर अस्पताल ले गया। रास्ते में मुलाजिम ने बताया कि आरोपी मानसिक रोगी है और अक्सर बच्चे उठाकर घूमा फिराकर छोड़ जाता है। आखिर में बच्चा घूमते हुए दूर निकलने से रास्ता भुलने की बात कह केस बंद कर दिया। - जैसा राम साहनी ने बताया।

सीधी बात आरोपी को पागल बता छोड़ने की कराएंगे जांच

आरोपी ने कितने बच्चे उठाए थे?
-आरोपी ने छह बच्चे उठाए थे।
पुलिस ने बताया कि 24 सितंबर को लापता विक्रम घर आ गया?
- तीन बच्चे भागकर घर आए थे।
पुलिस ने आरोपी पागल बता छोड़ा, जबरन फाइल बंद की?
-मेरे ध्यान में नहीं है, जांच कराएंगे।
बच्चा आरोपी के पास से बरामद हुआ मुलाजिमों ने दिखाया सड़क से मिला ?
-जांच करेंगे, मुलाजिमों का ये तरीका गलत है।



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Three more children were killed in 31 days Kidnap used to get hands and feet burnt, begging, controlled, on September 24, the child left the accused as a retarded, the case closed


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