�� Online shopping Info �� All types of letest tech Info update is provided hare (tech,shopping,auto,movie,products,health,general,social,media,sport etc.) Online products Shopping

test

Breaking

Post Top Ad

Your Ad Spot

Tuesday, October 13, 2020

फर्जी कागजों पर बने असलहा लाइसेंस की जांच के लिए एसआईटी गठित, 3 साल का खंगालेंगे रिकॉर्ड

(गगनदीप रत्न) बिना किसी कारण और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर असलहा लाइसेंस बनवाने वाले धारकों को ढूंढने के लिए पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल ने एसआईटी का गठन किया है। इसके अलावा लाइसेंस बनाने पर रोक लगा दी है। इस बारे में एक शिकायत डीजीपी पंजाब को ईमेल भेजी गई है। इसे गंभीरता से लेकर 3 सालों के रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी गई है। हैरानीजनक है कि हालात तब हैं, जब पंजाब में धड़ल्ले से असलहे का इस्तेमाल हो रहा है।

पुलिस इसे पकड़ा भी रही है। इतना जरूर है कि जांच के बाद कई नेताओं और मुलाजिमों पर गाज गिर सकती है। शहर में 16.5 हजार के करीब असलहा धारक और 22 हजार असलहा हैं। 2019 से पहले तो असलहे बनाने में काफी तेजी दिखाई गई थी, लेकिन इसके बाद लाइसेंस बनाने की गति को काफी धीमा कर दिया गया। बता दें कि 500 से ज्यादा लोगों ने अभी भी लाइसेंस बनवाने के लिए अर्जियां लगा रखी है।

लाइसेंस धारकों के दस्तावेजों और कारोबार की होगी जांच

हिंदू नेता वरुण मेहता ने शिकायत दी कि पंजाब में असलहे का प्रचलन है। लुधियाना में कुछ ज्यादा ही है। यहां कुछ ऐसे लोगों को असलहा दिया गया है, जिन्हें न तो कोई धमकी मिली है। न ही उनका कोई लंबा चौड़ा बिजनेस। इन लोगों ने असलहा अप्रैल 2017 से 30 सितंबर 2020 के दौरान ही बनाया। इसमें फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल भी हो सकता है, क्योंकि कुछ असलहा लॉकडाउन में ही बना दिया गया, जब सबकुछ बंद था।

लिहाजा असलहा धारकों का रिकॉर्ड चेक किया जाए। इस शिकायत के बाद डीजीपी दफ्तर ने उसकी जांच के लिए सीपी को लिखा। शिकायत मिलते ही सीपी ने मामले में एसआईटी बना दी। इसमें जॉइंट सीपी जे. एल्नचेजियन, डीसीपी लाॅ एंड ऑर्डर अश्वनी कपूर और एसीपी लाइसेंसी रणजीत सिंह को रखा गया। उन्हें पिछले तीन सालों के साथ सारे असलहा लाइसेंस का रिव्यू करने के लिए कहा गया। इसमें असलहा धारकों के दस्तावेज, उनके रीजन और कारोबार की जांच की जाएगी।

कई मामलों में फर्जी डोप का किया इस्तेमाल

विभागीय सूत्र बताते हैं कि काफी मात्रा में असलहे ऐसे हैं, जिसमें फर्जी डोप टेस्ट की रिपोर्ट का इस्तेमाल किया गया है, क्योंकि डोप टेस्ट के बिना असलहा लाइसेंस नहीं बनाया जा सकता। इसके अलावा कुछ ने अपने कारोबार में लाखों के लेन-देन को कारण बताया तो कुछ ने ज्यादा प्रॉपर्टी, असलियत में उनका कारोबार ही नहीं है।

सिर्फ शौक के लिए असलहा बना दिया गया। ये सब निम्न स्तर के मुलाजिमों और कुछ रसूखदारों की सिफारिश पर जेब गर्म करने के बाद किया गया। हालांकि इसपर कोई भी अधिकारी कमेंट नहीं कर रहा, क्योंकि जांच पूरी होने के बाद ही इसमें कुछ कहा जाएगा।

3 साल में बने 200 से ज्यादा लाइसेंस शकी

सूत्र बताते हैं कि 3 सालों का रिकॉर्ड चेक करने में पुलिस जुटी है। इससे पता चला है कि तीन सालों में 200 से ज्यादा असलहा लाइसेंस बने हैं। पहले तो पुलिस की नजर इन असलहा धारकों पर है, लेकिन सीपी ने एसआईटी को 16 हजार असलहा धारकों का रिकॉर्ड रिव्यू करने के लिए कहा है, ताकि ये न हो कि पहले भी किसी ने गलत तरीके से असलहा न बनवाया हो।

पकड़े जा चुके हैं नकली लाइसेंस

  • 2016 में फिरोजपुर में अमृतसर और फिरोजपुर डीसी आफिस के असलहा डिपार्टमेंट के मुलाजिमों की मिलीभगत से फर्जी लाइसेंस तैयार किए गए थे।
  • यूपी के जिले बागपत में 53 फर्जी लाइसेंस बनवाए गए थे और फिर उन पर हथियार भी लिए गए थे।
  • टारगेट किलिंग में पकड़े गए हत्यारों के नाम पर भी असलहा लाइसेंस जारी किया गया था।

एसआईटी बनाई गई है

असलहा लाइसेंस बनाने पर रोक लगा दी गई है। सारे असलहा लाइसेंस का रिव्यू करने के लिए एसआईटी बनाई गई है। अगर किसी का लाइसेंस बिना किसी कारण बनाया गया है तो उसे रद्द किया जाएगा और दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
-राकेश अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
फाइल फोटो


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3nMMvnt

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad

Your Ad Spot

Pages