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Tuesday, October 13, 2020

सिर्फ कागजों में रोजगार की गारंटी; योजना का सालाना बजट 500 करोड़, 200 करोड़ की ग्रेवल सड़कों का काम मशीनों से, 120 करोड़ की मजदूरी में हेरा-फेरी

जिले की सरहदी ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना से मंजूर ग्रेवल सड़कों के निर्माण में फर्जीवाड़ा हुआ है। मनरेगा योजना से सालाना 500 करोड़ रुपए का बजट खर्च होता है। इसमें सर्वाधिक 200 करोड़ रुपए सिर्फ ग्रेवल सड़कों पर खर्च हो रहा है। भास्कर ने दो माह तक सरहदी पंचायतों में मनरेगा से बन रही ग्रेवल सड़कों का स्टिंग किया तो चौंकाने वाले हकीकत सामने आई।


मस्टररोलों में श्रमिकों के नाम इंद्राज करने की इतिश्री कर मौके पर सड़कों का काम जेसीबी व ट्रैक्टरों से करवाया जा रहा है। ग्राम पंचायत रतरेड़ी कला, बीजावल, राणासर, द्राभा समेत आधा दर्जन पंचायतों में ग्रेवल सड़कों में फर्जीवाड़ा हुआ है। जिले में हर साल 1500 से 2000 ग्रेवल सड़कें स्वीकृत होती है। एक सड़क की लागत 15 से 18 लाख रुपए है।

इस हिसाब से कुल बजट 2 अरब 25 करोड़ रुपए खर्च हो रहा है। मनरेगा कार्यों का रेस्यू 60-40 का है। यानी 60 फीसदी बजट मजदूरी पेटे व 40 फीसदी सामग्री मद पर खर्च करने का प्रावधान है। ग्रेवल सड़कों के निर्माण कार्यों में मस्टररोल में श्रमिकों के नाम खानापूर्ति के लिए दर्ज कर रहे हैं, लेकिन मौके पर एक भी श्रमिक ने काम नहीं किया। मशीनों से काम पूरा कर भुगतान भी उठा लिया।

देश की सबसे बड़ी योजना मनरेगा से जिले में स्वीकृत ग्रेवल सड़कों में फर्जीवाड़े को लेकर भास्कर ने स्टिंग किया। 1 जून से 30 जुलाई तक भास्कर टीम ने गडरारोड पंचायत समिति की चार ग्राम पंचायतों में चल रहे ग्रेवल सड़कों की पड़ताल की। चारों पंचायतों में मौके पर काम जेसीबी व ट्रैक्टरों किया गया।

जबकि मस्टररोल में श्रमिकों के नाम दर्ज मिले। भ्रष्टाचार के इस खेल में सरपंच, ग्रामसेवक, जेटीए व विकास अधिकारी की शह पर सरकार के करोड़ों रुपए के बजट का बंटाधार हो रहा है। पेश है स्पेशल रिपोर्ट....

ये तीन अफसर हैं मनरेगा गड़बड़ी के जिम्मेदार

विकास अधिकारी: पंचायत समिति स्तर पर विकास कार्यों की मॉनिटरिंग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी विकास अधिकारी की होती है। मनरेगा योजना से स्वीकृत कार्यों के मस्टररोल विकास अधिकारी के हस्ताक्षर से जारी होते हैं। मौके पर काम की गुणवत्ता जांचने के साथ निरीक्षण करने का भी जिम्मा है। विकास अधिकारी ने ग्रेवल सड़कों के काम को एक बार भी नहीं देखा। जेटीए ने एमबी भरकर दे दी और भुगतान जारी कर दिया।


जेटीए: तकनीकी अधिकारी का काम जेटीए के पास है। काम शुरू होने पर रोजाना माप चढ़ाने की जिम्मेदारी है। मापदंडों के अनुसार काम हो रहा है या नहीं इसकी मॉनिटरिंग करनी होती है। काम पूरा होने पर एमबी भरनी होती है। इसके आधार पर ही भुगतान जारी होता है।


ग्रामसेवक: पंचायत में स्वीकृत सभी काम ग्रामसेवक के माध्यम से करवाए जाते हैं। मनरेगा में मस्टररोल स्वीकृत करवाने से लेकर काम पूरा करवाने की जिम्मेदारी है। सरपंच-ग्रामसेवक की मिलीभगत से आनन-फानन में काम पूरे करने की इतिश्री की जा रही है।

इन चार पंचायतों के उदाहरणों से समझिए मौके पर मजदूर ही नहीं मिले

बीजावल: छह ग्रेवल सड़कें हुई मंजूर जेसीबी व मशीनों से दो का काम पूरा

गडरारोड पंचायत समिति की ग्राम पंचायत बीजावल में मनरेगा योजना से 15 काम स्वीकृत है। इसमें 6 ग्रेवल सड़कों के काम शामिल है। ग्रेवल सड़कों के मस्टररोल में श्रमिकों को नियोजित कर रखा है, लेकिन मौके पर जेसीबी व ट्रैक्टरों से काम करवाया जा रहा है।

ग्रेवल सड़क निर्माण कार्य में अर्थ वर्क को छोड़कर एक दिन भी श्रमिक काम पर नहीं आए। सरपंच व ग्रामसेवक ने दो दिन में मशीनों से काम पूरा करवा दिया। जेटीओ ने मशीनों से करवाए कार्य का मेजरमेंट तैयार किया और बीडीओ ने भुगतान भी कर दिया।

राणासर: अर्थ वर्क छोड़ पूरा काम मशीनों से,14 लाख का भुगतान हो गया

गडरारोड की ग्राम पंचायत राणासर में मनरेगा कार्यो में जमकर धांधली हो रही है। 2 लाख रुपए की लागत से स्वीकृत ग्रेवल सड़क समेजो का पाड़ा का अर्थ वर्क मशीनों से पूरा हो चुका है। अब ग्रेवल डालने का काम बाकी है। वहीं ग्रेवल सड़क नोहड़ियों का पाड़ा की लागत 14 लाख रुपए है।

इस सड़क का अर्थ वर्क ट्रैक्टरों से करवाया जा चुका है। इसके बाद भुगतान भी उठा लिया। मशीनों से काम करवाने का खेल बीते छह माह से चल रहा है। मिलीभगत से आनन-फानन में अधूरे काम पूरा करवाए जा रहे हैं।

रोहिड़ी: फर्जीवाड़े का खुलासा, फिर भी मशीनों से तैयार हो रही ग्रेवल सड़कें

गडरारोड पंचायत समिति की ग्राम पंचायत रोहिड़ी में मनरेगा योजना से 4 ग्रेवल सड़कों का काम स्वीकृत है। जून में एक सड़क का काम पूरा हो चुका है। सरपंच व ग्रामसेवक ने मस्टररोल में श्रमिकों के नाम इंद्राज करवाने के बाद जेसीबी व ट्रैक्टरों से सड़क का काम पूरा करवा दिया।

शिकायत पर जांच में काम मशीनों से करवाने की पुष्टि होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। बीते छह माह में तीन ग्रेवल सड़कों का निर्माण हो चुका है। अधिकारियों की मिलीभगत की वजह से ग्रेवल सड़कों में फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है।

रतरेड़ी कला: पंचायत में 11 ग्रेवल सड़कें स्वीकृत,रातों रात जेसीबी व ट्रैक्टरों से बनाई सड़कें

ग्राम पंचायत रतरेड़ी कला में मनरेगा योजना से 11 ग्रेवल सड़कों के काम स्वीकृत है। डामर सड़क से कपासिया तक ग्रेवल सड़क का काम चल रहा है। जून में निर्माणधीन ग्रेवल सड़क का काम पूरा करवाने के लिए जेसीबी व ट्रैक्टर लगाए। रातों रात ग्रेवल सड़क का काम भी पूरा करवा दिया।

दो पंखवाड़े का भुगतान भी उठा लिया। जबकि अभी मौके पर काम अधूरा है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद रात में ही मशीनों से काम करवाया। सामग्री सप्लाई करने वाली फर्म को एडवांस में भुगतान कर दिया। जांच में खुलासा होने पर रिकवरी के आदेश भी जारी हुए।

जिले में मनरेगा योजना की स्थिति

5.05 लाख जिले में जोब कार्डधारी
1500 से 2000 ग्रेवल सड़कें

भास्कर एक्सपर्ट

बाड़मेर में सबसे ज्यादा ग्रेवल सड़काें पर गड़बड़झाला

बाड़मेर में ग्रेवल सड़कों में सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा होता है। जिला परिषद से योजना का प्लान मंजूर होने के बाद पंचायत समिति स्तर पर मस्टररोल जारी होते हैं। जीओ टेगिंग के बाद मौके पर काम शुरू होता है। ग्रामसेवक, रोजगार सहायक व सरपंच मिलकर ग्रेवल सड़कों का काम जल्दी पूरा करवाने के लिए जेसीबी व ट्रैक्टर लगा देते हैं।

जो काम 20 दिन में पूरा होना है वो काम तीन से चार दिन में ही हो जाता है। 15 दिन में पखवाड़ा पूरा होने पर जेटीए को मेजरमेंट तैयार करना होता है, लेकिन जेटीए मौके पर जाने की बजाय ऑफिस में बैठे ही एमबी भर देता है। इसके बाद भुगतान जारी कर देते हैं। मनरेगा के कई कामों में गड़बड़ियों का खेल चलता है। मस्टररोल स्वीकृति के साथ कमीशन का खेल शुरू होता है।



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जिले की सरहदी ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना से मंजूर ग्रेवल सड़कों के निर्माण में फर्जीवाड़ा  हुआ है


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