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Monday, October 26, 2020

ज्यूडिशियल कांप्लेक्स में जाने नहीं दिए अफसर व कर्मी, जियो एक्सचेंज पर जड़ा ताला, बिजली काटी

किसान मेघराज बावा की मौत के 18वें दिन बाद भी परिवार को मुआवजा नहीं मिलने से गुस्साए भारतीय किसान यूनियन ने 5वें दिन भी जिला प्रबंधकीय परिसर का घेराव किया। किसान दिन-रात परिसर के तीनों गेट के सामने डटे हैं। वहीं, 26 दिनों से रेलवे स्टेशन पर बैठे 29 किसान- मजदूर संगठनों के सदस्यों ने शहर में रोष मार्च कर बरनाला रोड स्थित जियो एक्सचेंज को ताला लगाकर बिजली काट दी।


सोमवार को कर्मचारी व अधिकारी अपने दफ्तरों में जाने के लिए पहुंचे मगर किसानों ने किसी को अंदर नहीं जाने दिया। किसानों के धरने में यूनियन के राज्य कार्यकारिणी प्रधान जसविंदर सोमा, जिला प्रधान अमरीक सिंह गंढूआ और दरबारा छाजला ने संबोधित करते हुए कहा कि किसान मेघराज की मौत को 18 दिन हो गए है मगर प्रशासन सिवाए आश्वासन के उन्हें कुछ नहीं दे रहा है। किसानों को कानून पढ़ाया जा रहा है। मृतक परिवार को मुआवजा देने के लिए सरकार आनाकानी कर रही है जबकि किसान की मौत कृषि संघर्ष के दौरान हुई है। किसान नेताओं ने कहा कि संघर्ष के दौरान पंजाब में जितने भी किसानों की मौत हुई है भाकियू उनके परिवारों को हर हाल में मुआवजा दिलाकर रहेगी। जबकि तक पीड़ित परिवारों को इंसाफ नहीं मिलेगा, किसान पीछे नहीं हटेंगे।

वहीं, दूसरी तरफ 26 दिनों से रेलवे स्टेशन पर बैठे 29 किसान- मजदूर संगठनों के सदस्यों ने शहर में रोष मार्च कर बरनाला रोड स्थित जीओ एक्सचेंज को ताला लगाकर बिजली सप्लाई काट दी। किसानों ने कहा कि अगर जबरी खोलने का प्रयास किया गया तो एक्सचेंज के सामने पक्का धरना दिया जाएगा।

जम्हूरी किसान सभा पंजाब के ऊधम सिंह संतोखपुरा, भाकियू राजेवाल के गुरमीत कपियाल, भाकियू डकोंदा के शामदास कांझली, भाकियू सिद्धूपुर के सुरजीत सिंह और कीरती किसान यूनियन के भूपिंदर लौंगोवाल ने कहा कि केंद्र सरकार पंजाब में मालगाड़ियों के आने पर रोक लगाकर किसानों को डराना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगता है कि वह ऐसे फैसलों से पंजाब के किसानों के संघर्ष को दबा लेंगे। किसानों की एक जुटता भाजपा सरकार को उसके फैसले रद्द करने को मजबूर कर देगी। भाकियू ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कार्पोरेट घरानों का साथ दे रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

कचहरी परिसर की दुकानें बंद होने से रोष, किसानों के घेराव का विरोध

संगरूर कचहरी परिसर में करीब 110 दुकानों का काम बंद होने से दुकानदारों में रोष फैल गया। किसान के घेराव के कारण कचहरी परिसर में दुकानों का काम ठप हो जाने के कारण दुकानदारों ने कचहरी परिसर के सामने सड़क पर धरना दिया। दुकानदार गुरमीत सिंह, मनी कथूरिया, जवाहर लाल और बिट्टू नागरा ने कहा कि किसानों के प्रदर्शन के कारण 4 दिनों से दुकानें बंद है। किसी को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। उनको और लोगों को नुकसान हो रहा है। दुकानदारों ने कहा कि जिला प्रशासन कचहरी परिसर के अंदर जाने का रास्ता खुलवाए। इसके बाद दुकानदारों और किसानों में सहमति हो गई कि दुकानों को खोल दिया जाएगा मगर कोई भी व्यक्ति सरकारी दफ्तरों में नहीं जाने दिया जाएगा।

रजिस्ट्री, ट्रांसपोर्ट, लाइसेंस, चालान का काम न होने से लोग हो रहे प्रभावित
ज्यूडिशियल कांप्लेक्स के सामने भारतीय किसान यूनियन की ओर से 5 दिनों से दिए जा रहे धरने के कारण कचहरी परिसर में रजिस्ट्री समेत ट्रासपोर्ट, लाइसेंस, चालान आदि का काम ठप पड़ा है। इसके अलावा प्रबंधकीय परिसर में स्थित सेवा केंद्र का काम बंद है। जहां असलहा लाइसेंस, जन्म मौत, आमदन, रेजीडेंस, जाति, रूरल सर्टिफिकेट बनाने सहित कई तरह के काम बंद पड़े हैं। बता दें कि सेवा केंद्र में रोजाना 500 से अधिक लोग अपना काम करवाने आते थे जबकि करीब 1 हजार व्यक्ति कचहरी परिसर समेत प्रबंधकीय परिसर में दूसरे काम के लिए पहुंचते हैं। मगर किसानों के धरने और कर्मचारियों व अधिकारियों को अंदर न जाने के कारण सभी काम ठप है और लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

कृषि कानूनों से आढ़ती, मजदूर, कमेटी कर्मी व ट्रक ड्राइवर भी प्रभावित होंगे

भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के किसानों ने कृषि कानूनों के विरोध में एसर पेट्रोल पंप के सामने धरना जारी रखा। किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान छात्रों ने इंकलाबी गीत पेश किए। इस मौके यूनियन के राज्य उप प्रधान जनक सिंह भूटाल ने कहा कि इन कानूनों से किसान तो तबाह होंगे ही बल्कि आढ़ती, मजदूर, शैलर मालिक, मार्केट कमेटी मुलाजिम, ट्रक ड्राइवर भी प्रभावित होंगे। जिस कारण किसान इन्हें किसी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे। सोमवार को धरने के दौरान मक्खन पापडा, सुखदेव कडैल, बलविंदर मनियाना, बलजीत बल्लरा, रिंकू मूनक, गगन शर्मा, हरपाल सिंह आदि मौजूद थे। धरने में किसान परिवारों की महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल थीं।



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Officers and workers were not allowed to go to the judicial complex, lock on Jio exchange, power cut


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