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Sunday, October 11, 2020

स्वस्थ होकर करमेला बोलीं घबराएं नहीं, मुकाबला करें

97 साल की उम्र में करमेला लकड़ा ने काेराेना काे हरा कर जंग आसानी से जीत ली है। करमेला को शनिवार को कोविड-19 अस्पताल से डिस्चार्ज किया और अब वह अपनी संस्था वापस पहुंच चुकी है। करमेला गिनाबहार मिशन संस्था से जुड़ी है और संस्था के हॉस्टल में ही रहती है। करमेला से भास्कर ने जब बातचीत की तो उन्होंने जिंदादिली से भरपूर जवाब दिए।
करमेला लकड़ा ने बताया कि कोरोना से ठीक होने में उसे कोई विशेष शारीरिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। डॉक्टरों द्वारा बताए गए दवाओं को उन्होंने नियमित लिया। अस्पताल से ठीक होकर वापस जाने की इच्छाशक्ति बेहद अधिक थी। इस इच्छाशक्ति ने शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता अपने आप पैदा कर दी। करमेला ने बताया कि पहले के खानपान और नियमित दिनचर्या की वजह से वह इस उम्र तक स्वस्थ हैं। शुरू से उन्होंने भोजन के समय के साथ कोई समझौता नहीं किया है। सुबह 7 बजे नास्ता, दोपहर 12 बजे लंच और शाम 7 बजे डीनर, यही उनके खाने का समय है। आज भी वह इसी समय पर भोजन करती हैं। करमेला ने बताया कि उम्र अधिक होने की वजह से उन्हें मोतियाबिंद है और अब वह देख नहीं सकती हैं। पर आज भी प्रतिदिन सुबह 5:30 बजे उठ जाना और टहलना उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। करमेला पूर्व में मिशन संस्था में रहते हुए गृहणियों को पढ़ाने, पारिवारिक जीवन में शांति के लिए शिक्षा देती थीं। इसके साथ ही वह सिलाई कढ़ाई सिखाने का भी काम करती थीं। अब वह रिटायर हो चुकी हैं। करमेला एक हार्ड वर्कर वुमन रही हैं। लाेगों को करमेला ने संदेश दिया है कि कोराेना से डरने की जरूरत नहीं है। सरकार द्वारा बताए गए हर गाइडलाइन का पालन कर संक्रमण से बचे रहें और यदि कोई लक्षण दिख रहा है तो जांच जरूर कराएं। ताकि आपके जरिए यह बीमारी किसी और को ना फैले।

कोई भी बीमारी सिर्फ परीक्षा लेने आती है - फिलोमिना कुजूर भी शनिवार को ही कोविड-19 अस्पताल से डिस्चार्ज हुई है। अधिक उम्र होने के कारण फिलेामिना अब सुन नहीं सकती है। चलने के लिए दोनों हाथों से छड़ी का उपयोग करती हैं। फिलोमिना गिनाबहार मिशन संस्था से जुड़ी हैं और वहीं के हॉस्टल में रहती हैं। फिलोमिना ने कहा कि कोई भी बीमारी सिर्फ परीक्षा लेने के लिए आती है। यदि हममें ईश्वर के प्रति आस्था है तो हम उनकी मदद से उस परीक्षा से जल्दी उबर सकते हैं।

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत: फिलोरा
फिलोरा भी गिनाबहार मिशन संस्था की हैं और शनिवार को यह कोविड-19 हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुई हैं। फिलोरा का कहना है कि बीमारी को हराना या बीमारी से खुद हार जाना यह आपके मन पर निर्भर करता है। मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। हम एक ही संस्था के तीनों वृद्ध महिलाएं एक साथ कोरोना पॉजिटिव निकली थीं। हॉस्पिटल में हम ठीक होने के बाद क्या करेंगे इस पर चर्चा करते थे। कभी भी इस बात पर चर्चा नहीं हुई कि मुझे सांस लेने में तकलीफ हो रही है या मेरी सूंघने की शक्ति चली गई।

जिले का रिकवरी रेट अच्छा
जशपुर जिले का रिकवरी रेट बेहद अच्छा है। 10 अक्टूबर तक की स्थिति में जिले में 1278 लोग कोराेना संक्रमण के शिकार हुए हैं, जिसमें से 983 लोग ठीक हो चुके हैं। 288 एक्टिव केस अभी जिले में हैं और 7 लोगों की जान गई है।



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