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Saturday, October 10, 2020

अरोड़ा ने कहा -टेक्नोलॉजी न अच्छी है और न बुरी, आपका इस्तेमाल इसको अच्छा-बुरा बनाता है

अगर आप स्क्रीन का उपयोग खुद को आगे बढ़ने के लिए करते हैं तो ठीक है, लेकिन अगर ये आपको परेशान कर रही है तो ये खतरा है। टेक्नोलॉजी न अच्छी है और न ही बुरी, लेकिन आपका इस्तेमाल इसको अच्छा या बुरा बनाता है। ये कहना था ह्यूमन टेक्नोलॉजी एडवोकेट और टेड एक्स स्पीकर रहे रिजुल अरोड़ा का।

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी (पेक) में एक सप्ताह से मनाए जा रहे वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे के समापन पर शनिवार की शाम को ‘दि सोशल डिल्लेम्मा इज टेक्नोलॉजी अफेक्टिंग योअर हेल्थ’ वेबिनार कराया गया। जिसमें उन्होंने टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग और इससे बचने पर बात की।

देर शाम स्टूडेंट्स काउंसिल सेल की ओर से इस वर्कशॉप के दौरान सवाल-जवाब का दौर चला। इसमें बात हुई कि सोशल मीडिया एक प्रॉब्लम बन रहा है। इससे लो सेल्फ एस्टीम बढ़ रही है। गेमिंग के दौरान समय का पता ही नहीं लगता कि कितना समय लग जाता है। बाथरूम में फोन लेकर जाना बढ़ रहा है। सिर्फ 20 मिनट लगते हैं बाथरूम में, लेकिन फिर भी लोग फोन लेकर जाते हैं क्योंकि आदि हो रहे हैं।

चिंताजनक हैं आंकड़े
वक्ता ने इस बारे में बहुत गंभीर रिसर्च को भी शेअर किया। उन्होंने बताया कि देर रात तक फोन के उपयोग से मेलाटॉनिक का प्रोडक्शन कम हो जाता है। इस प्रॉब्लम को कम करने के लिए रात के समय स्क्रीन का यूज कम करें। इसको ग्रे कर लें, नाइट लाइट का उपयोग करें।

73 फीसदी को लगता है कि इसके मानसिक और शारीरिक असर हो रहे हैं लेकिन फिर भी वह इसे इग्नोर कर रहे हैं। 43 फीसदी यंगर्स्टस टूटे फोन की बजाए टूटी हड्डी को चुनने के लिए तैयार हैं। दो तिहाई लोग फोन के बिना अकेले सोचने की बजाए कुछ सेकेंट्स के इलेक्ट्रिक शॉक के साथ रहने को तैयार हैं।

ये हुआ पूरा सप्ताह
पेक की ओर से 4 से 10 अक्टूबर तक हुए प्रोग्राम्स के दौरान कई प्रोग्राम कराए गए। जिसमें मेंटल अवेयरनेस पर प्रोग्राम के अलावा इसी विषय से जुड़े कंपीटिशन कराए गए। भारत में इस बारे में लोग बात ही नहीं करना चाहते, लेकिन इस विषय पर जागरूकता की बहुत जरूरत है।

स्टूडेंट्स काउंसिलिंग सेल की ओर से कराए गए इस प्रोग्राम ‘टुगेदर व्ही थ्राइव’ के तहत अलग-अलग कल्चरल क्लब्स ने 9 इवेंट्स कराए। सोलो सिंगिंग कंपीटिशन, सोलो डांस, कुकिंग, कविता पाठन, शायरी, डिबेट, वर्चुअल तंबोला, वाॅटर कलर पेंटिंग और ग्रुप वीडियो मेकिंग इसका हिस्सा थे।

ये रहे नतीजे
चित्रकारी : मुस्कान सिंह, दिव्या शर्मा, धवन आनंद।
डिबेट : काश्वी, सुखमन, अनन्या।
गायन भारतीय :परेश, सुजॉय।
गायन वेस्टर्न : अंशुल, अनमोलप्रीत।
पोएट्री हिंदी: शुभम, प्रचीता पांडे
पोएट्री इंग्लिश : अक्षय दुबे अौर कैलाश जैन
शायरी: मनीष, हर्ष पुंडीर और उज्जवल।



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फाइल फोटो


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