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Monday, November 30, 2020

दल बल सहित, वो भी बिना कॉलर आईडी के, अचानक गांव में घुसे तो होगी बर्बादी

चंदा हथिनी व उसका दल धमतरी के गंगरेल बांध के डुबान इलाके से वापस कांकेर जिले के चारामा के जंगलों में पहुंच गया। सबसे खतरनाक स्थिति यह हो गई कि चंदा हाथी में लगे सेटेलाइट रेडियो कॉलर आईडी ने काम करना बंद कर दिया है। जिससे हाथियों के ग्रुप का अब हर समय सहीं लोकेशन नहीं मिल रहा है। इससे ग्रुप के अचानक गांव में घुसने से खतरनाक हालात पैदा हो सकते हैं। ग्रुप में दो बच्चा हाथियों को मिलाकर कुल 23 हाथी हैं।
हालांकि इसके लिए चारामा का वन अमला पूरे समय हाथी की मौजूदगी वाले इलाके में तैनात है। लेकिन दूर से मैनुअल तरीके से उनकी जानकारी रात में लेना काफी मुश्किल है। हाथी गांव के करीब आ भी गए तो उनकी उपस्थिति का पता नहीं चल सकेगा। जिससे स्थिति खतरनाक हो सकती है। पिछले माह हल्बा से पंडरीपानी इलाके में आने के बाद से चंदा हाथी को पहनाया गया कॉलर आईडी ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा था। इसके बाद बालोद जिले में घूमने के दौरान भी उसका लोकेशन कभी कभार ही मिल रहा था। बालोद जिले से 21 नवंबर को हाथी का दल वापस कांकेर जिले के चारामा के कुर्रूटोला इलाके में पहुंचा था। लेकिन इसका लोकेशन नहीं मिल पाया था।
इसकी जानकारी तब सामने आई जब हाथी एक किसान के घर व उसकी बैलगाड़ी में तोड़ फोड़ किए। इसके बाद से हाथी का लोकशन नहीं मिल रहा है। इसके बाद से हाथी बालोद जिले के जंगल में पहुंच लगातार नेशनल हाईवे क्रॉस करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन इसकी जानकारी सामने नहीं आ रही थी। 25 नवंबर की रात जब हाथी सड़क पर आए तक इसकी जानकारी हुई और आनन फानन में बालोद वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों ने नेशनल हाईवे को ब्लॉक उन्हें क्रास कराया। इसके बाद धमतरी जिले से होते हुए बीती रात हाथी बांध व महानदी के किनारे किनारे चारामा के मुजालगोंदी, माहुद, तांसी, भिरौद, करिहा, तुएगहन, पंडरीपानी होते हुए गितपहर तथा दुर्गाटोला के जंगल आरएफ 220 में पहुंच गए हैं।

तुएगहन में केले और पपीते के पेड़ को रौंदा
बीती रात हाथी तुएगहन के बस्ती में पहुंच गए थे। जहां चार बाड़ियों घुस कर फल फसलों को नुकसान पहुंचा। एक किसान द्वारा धान को काट कर तिरपाल से ढंक सुरक्षित रखा गया था। जिसका तिरपाल फाड़ पूरी कटी फसल को तहस नहस कर दिया।

हाथियों की सुरक्षा में अमला तैनात किया
चारामा वन परिक्षेत्र अधिकारी एसआर सिंग ने बताया कि हाथी की सुरक्षा के लिए अमला पूरे समय उस इलाके में तैनात है। हाथियों की पल पल की जानकारी ली जा रही है। जो नुकसान हुआ है उसका प्रकरण बनाया जाएगा।

तीन साल बाद फेल हो जाता है कॉलर आईडी
वन विभाग के जानकार अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार चंदा हाथी को 2017 में सरगुजा के जंगल में सेटेलाइट रेडियो कॉलर आईडी पहनाया गया था। यह आईडी तीन साल बाद काम करना बंद कर देता है। यदि खराब हो गया तो उसे फिर से पहनाया जाना चाहिए।

ट्रंकुलाइज कर पहनाते हैं कॉलर आईडी
विभाग के रिटायर्ड सीसीएफ केके बीसेन ने बताया कि हाथी की जानकारी रखने ग्रुप के किसी भी हाथी को कॉलर आईडी पहनाया जाता है। महासमुंद में चंदा को पहनाया गया था। इसके लिए हाथी को ट्रंकूलाइजर गन से एम 99 या कीटामिन गायलोजिन का इंजेक्शन देकर बेहोश किया जाता है। एम 99 मिलना काफी मुश्किल है। लेकिन हाथी के लिए यही सटीक है। जिससे हाथी गिर जाते हैं। जबकि कीटामिन से इसका कम चांस होता है। ग्रुप में किसी को भी टार्गेट कर उसे बेहोश कर जल्दी से कालर आईडी पहनाया जा सकता है। यदि चंदा का कॉलर आईडी काम नहीं कर रहा है तो विभाग के सांइटिस्ट, डॉक्टर, बायोलाजिस्ट की उपस्थिति में बैंगलोर की कंपनी द्वारा फिर पहनाया जा सकता है।

बेरीकेड्स लाइट से भी रोके जा सकते हैं हाथी
विभाग के विशेषज्ञ ने बताया हाथियों को बस्ती में घुसने से रोकने हाथी विकर्षण बेरीकेड्स लाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह लाइट दो किमी लंबी दूरी में लगाई जाती है। जो ब्लिकिंक करती है। जिससे हाथी बस्ती की ओर न आकर जंगल में ही रहते हैं।



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Including contingent force, if they enter the village without caller ID, then will be ruined


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