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Saturday, November 28, 2020

अगले महीने प्रदेश प्रभारी के आने से पहले जिलों और मोर्चा-प्रकोष्ठों में नियुक्तियां

भाजपा की प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी के दौरे से पहले बचे हुए तीन जिलों के अध्यक्षों की नियुक्ति करने की तैयारी है। इसके अलावा मोर्चा-प्रकोष्ठ में भी नियुक्तियां होनी है। प्रदेश प्रभारी पुरंदेश्वरी और सह प्रभारी नितिन नवीन का पहला दौरा दिसंबर में प्रस्तावित है। प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय की नियुक्ति को 6 महीने होने को हैं, लेकिन अब तक तीन जिलों के अध्यक्ष तय नहीं किए जा सके हैं। तीनों जगह नेताओं के बीच खींचतान के कारण ऐसी स्थिति बनी है।

इसका नजारा दो दिन पहले फिर देखने को मिला, जब युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू के दौरे पर दो गुट उलझ गए। प्रदेश प्रभारी के पहले दौरे पर यह सवाल उठ सकते हैं कि 6 माह में भी तीन जिलों में नियुक्तियां क्यों नहीं हो सकी हैं। सात मोर्चा के अध्यक्ष तय किए गए हैं, लेकिन उनकी कार्यकारिणी नहीं बन पाई है। प्रकोष्ठों के संयोजक की भी नियुक्ति नहीं हो सकी है।

यही वजह है कि प्रदेश प्रभारी के दौरे से पहले बची हुई नियुक्तियां करने की तैयारी है। इसे लेकर संगठन के नेता इसलिए भी गंभीर हैं, क्योंकि पुरंदेश्वरी के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष जगतप्रकाश नड्डा का प्रवास है। वे यहां दो दिन समय बिताएंगे और कार्यकर्ताओं से रूबरू होंगे।

देरी के कारण संगठन के विरोध में नेता मुखर

विपक्ष के रूप में भाजपा अपने कार्यकर्ताओं में उत्साह नहीं ला पाई है। मरवाही उपचुनाव में हुई हार के बाद भी कार्यकर्ता निराश हुए हैं। जिलों और मोर्चा-प्रकोष्ठ में नियुक्तियां नहीं होने के कारण कार्यकर्ता अपने ही नेताओं पर सवाल उठा रहे हैं। संगठन के नेता इस दुविधा में भी हैं कि प्रदेश प्रभारी के दौरे पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने न आए। खबर है कि स्थानीय नेताओं से रायशुमारी के बाद जिलाध्यक्षों के नाम पर घोषित किए जा सकते हैं। इसी बीच मोर्चा-प्रकोष्ठ में भी नियुक्तियां की जा सकती हैं।

इधर, विवादों के कारण फंसी रायपुर की टीम

रायपुर जिले की कार्यकारिणी में अब नया पेंच आ गया है। फाफाडीह मंडल की जिस पदाधिकारी को हटाया गया है, उससे रायपुर जिले की नियुक्तियों पर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर एक बार फिर मंडलों में हुई कई नियुक्तियों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। इससे पहले जिलाध्यक्ष की नियुक्ति के समय भी ऐसा माहौल बना था। यही वजह है कि सांसद सुनील सोनी और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल व राजेश मूणत से बातचीत के बाद भी कार्यकारिणी की घोषणा नहीं की जा रही है। एक पदाधिकारी के विवाद में फंसने के कारण और देरी की बात सामने आ रही है।



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रायपुर भाजपा कार्यालय


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