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Friday, November 27, 2020

सारी ‘किलेबंदी’ तोड़ चार महीने का राशन-पानी ले किसान दिल्ली में,सिंघु बॉर्डर पर पुलिस-किसानों के बीच झड़प, पथराव और लाठीचार्ज

दिल्ली से दूर रखने की तमाम किलेबंदी भेदकर किसान राजधानी पहुंच गए हैं। पानी की बौछार, बोल्डर और आंसू गैस के गोले नाकाम रहने पर पुलिस ने हाईवे 10-10 फीट तक खोदा पर चार महीने का राशन लेकर निकले किसानों ने दिल्ली पहुंचकर ही दम लिया। सरकार तक सीधे आवाज पहुंचाने के लिए कुंडली और सिंघु बॉर्डर पर हजारों किसान जमा हैं। मिनी जेल बनाने के लिए पुलिस ने शुक्रवार सुबह 9 ग्राउंड की मांग की जिसे दिल्ली सरकार ने ठुकरा दिया। इसके बाद पुलिस ने किसान नेताओं को बुराड़ी स्थित निरंकारी ग्राउंड के लिए मनाया। शुरुआत में आनाकानी कर शाम को किसानों के कुछ ग्रुप बुराड़ी रवाना हो गए।

सिंघु-कुंडली बॉर्डर पर अभी भी हजारों की संख्या मे किसान मौजूद हैं। बुराड़ी जाएं या नहीं, कई किसान जत्थेबंदियां शनिवार सुबह फैसला लेंगी। इससे पहले पंजाब-हरियाणा में पुलिस और किसानों के बीच दिनभर संघर्ष चलता रहा। कई किसानों के जख्मी होने की सूचना है। शंभू बैरियर और बठिंडा-डबवाली बॉर्डर पर किसानों ने बैरिकेड तोड़े। वहीं, पानीपत में किसानों ने पत्थरबाजी की। यहां 3 घंटे बाद पुलिस ने किसानों को जाने दिया। टिकरी बॉर्डर पर भी दिनभर विरोध प्रदर्शन के कारण गुड़गांव बॉर्डर पर जाम रहा। कुंडली बॉर्डर पर पुलिस और बीएसएफ ने कई लेयर की नाकेबंदी की हुई है।

जत्थेबंदियों का रुख

भारतीय किसान यूनियन के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा हम सरकार की धक्केशाही सहन नहीं करेंगे। आंदोलन खत्म करने का षड्यंत्र रचा तो पूरी दिल्ली का घेराव किया जाएगा। ठोस फैसला होने के बाद ही हम हटेंगे।
भारतीय किसान यूनियन उग्राहां के सचिव झंडा सिंह ने कहा कि किसान अब दिल्ली आ चुके हैं। लंबे समय से संघर्षरत किसान किसी भी कीमत पर अपना हक लेकर ही रहेंगे। हमारा आंदोलन अटल है।

भारतीय किसान यूनियन कादियां के प्रधान हरमीत सिंह कादियां ने कहा कि शुक्रवार को बड़ी संख्या में किसान दिल्ली पहुंच चुके हैं और कुछ शनिवार दोपहर तक दिल्ली पहुंचेंगे। दोपहर बाद किसान जत्थेबंदियों की संयुक्त मीटिंग होगी।

केंद्र का रुख

किसानों के दिल्ली पहुंचने के बाद पीएमओ सक्रिय हो गया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह किसानों के संपर्क में हैं। किसानों से बातचीत के लिए गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 3 मंत्रियों की समिति बन सकती है। उम्मीद जताई जा रही है कि 3 दिसंबर से पहले बातचीत हो सकती है।

कानून फायदेमंद : कृषि मंत्री
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने फिर दोहराया, ‘केंद्र सरकार किसानों से बातचीत के लिए तैयार है। सरकार ने जो कानून बनाए हैं, वे किसानों के लिए फायदेमंद हैं।



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कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन


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