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Saturday, December 5, 2020

जिले में 268 स्कैनिंग सेंटर, जिन पर भी रेड हुई- वे मामले कोर्ट में पर सेंटर खुल गए

पठानकोट बाईपास चौक स्थित बाघा अस्पताल में शुक्रवार को लिंग निर्धारण जांच टेस्ट के मामले में थाना-8 की पुलिस ने रेड की लेकिन डॉ. हरजीत सिंह कंग हाथ नहीं लगे। एसएचओ कमलजीत सिंह यह कहकर छुटकारा पा रहे हैं कि छापेमारी जारी है।

वहीं, 3 नवंबर को रतन अस्पताल में हुए स्टिंग ऑपरेशन में भी अभी तक थाना-4 की पुलिस अल्ट्रासाउंड मशीन के रिकॉर्ड को ही सामने लाने की कोशिश कर रही है। जबकि सेहत विभाग के डॉक्टर भी चुप हैं। अधिकारियों का कहना है कि पर्चा दर्ज करने की सिफारिश की गई है।

बता दें कि तीन साल में जिले में चार बार स्कैनिंग सेंटरों पर कार्रवाई की गई। इनमें रत्न अस्पताल और बाघा अस्पताल में पिछले एक महीने में ही कार्रवाई हुई है जबकि इससे पहले करतारपुर के गुरु तेग बहादुर अस्पताल और भोगपुर स्थित बाघा अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ पहले से मामला चल रहा है। इन मामलों में लिंग निर्धारण जांच का पर्दाफाश हुआ था, जिसके बाद केस कोर्ट में है और स्कैनिंग सेंटर और अस्पताल चल रहे हैं।

31 दिनों में दो अस्पतालों में स्टिंग हुआ और दोनों ही डॉक्टरों की नहीं हो सकी गिरफ्तारी

जिला सेहत विभाग के अधीन आते जिला परिवार कल्याण विभाग के तहत वर्तमान में 268 स्कैनिंग सेंटर चल रहे हैं और इनमें कोई गैर कानूनी काम नहीं हो रहा। लेकिन चंडीगढ़ की डिटेक्टिव कंपनी के सदस्यों ने एक महीने में दो अस्पतालों में लिंग निर्धारण के स्टिंग कर दिए।

दोनों अस्पतालों के डॉक्टर फरार हो गए जबकि सेहत विभाग कुछ नहीं कर पाया। विभाग के ही डॉक्टरों का कहना है कि सेहत विभाग के कुछ अधिकारियों का फ्रेंडशिप कल्चर किसी भी स्कैनिंग सेंटर पर कार्रवाई नहीं होने देता। जब भी किसी मामले में सेहत विभाग कार्रवाई करने की सोचता है तो संबंधित सेंटर के डॉक्टर को पहले ही पता चल जाता है और वह विभाग के हाईकमांड से फोन करवा देता है और कार्रवाई होने से पहले खत्म हो जाती है।

जिला सेहत विभाग के अधीन आते जिला परिवार कल्याण विभाग के तहत वर्तमान में 268 स्कैनिंग सेंटर चल रहे हैं और इनमें कोई गैर कानूनी काम नहीं हो रहा। लेकिन चंडीगढ़ की डिटेक्टिव कंपनी के सदस्यों ने एक महीने में दो अस्पतालों में लिंग निर्धारण के स्टिंग कर दिए।

दोनों अस्पतालों के डॉक्टर फरार हो गए जबकि सेहत विभाग कुछ नहीं कर पाया। विभाग के ही डॉक्टरों का कहना है कि सेहत विभाग के कुछ अधिकारियों का फ्रेंडशिप कल्चर किसी भी स्कैनिंग सेंटर पर कार्रवाई नहीं होने देता। जब भी किसी मामले में सेहत विभाग कार्रवाई करने की सोचता है तो संबंधित सेंटर के डॉक्टर को पहले ही पता चल जाता है और वह विभाग के हाईकमांड से फोन करवा देता है और कार्रवाई होने से पहले खत्म हो जाती है।

कूड़े में भ्रूण मिले पर आरोपी नहीं

पीसीपीएनडीटी एक्ट के अधीन गैर कानूनी काम रोकने के लिए सिविल सर्जन की देखरेख में कमेटी गठित की गई है लेकिन आज तक मंथली मीटिंग में रिन्युअल देने के अलावा कोई फैसला नहीं हुआ है। जिन स्कैनिंग सेंटरों पर पहले से मामले दर्ज हैं, उनकी भी दोबारा इंस्पेक्शन नहीं की गई। बता दें कि जिले में बीते 2 साल में शहर के अलग-अलग एरिया से 6 से अधिक भ्रूण मिल चुके हैं, लेकिन आरोपी पकड़े नहीं जा सके।

अब तक किसी डॉक्टर पर कार्रवाई नहीं

सेहत विभाग के अफसर बताते हैं कि जब किसी मामले में स्कैनिंग सेंटर सील किया जाता है तो संबंधित डॉक्टर स्टेट हेल्थ विभाग और सियासी पहुंच का इस्तेमाल कर स्कैनिंग सेंटर को खुलवाने की मंजूरी ले आता है। दूसरी तरफ विभाग में नौकरी कर रहे कुछ डॉक्टरों के आरोपी स्कैनिंग सेंटरों के साथ फ्रेंडशिप होने के चलते उन्हें पूरी खबर रहती है कि विभाग उनके खिलाफ क्या कार्रवाई करने जा रहा है।



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कार्रवाई के बाद बंद बाघा अस्पताल।


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