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Thursday, December 3, 2020

सरकार आगे बढ़ी, किसान वहीं खड़े; कल फिर बैठक,साढ़े 7 घंटे की मैराथन मीटिंग में सरकार ने कई मांगों पर दिए सकारात्मक संकेत

कृषि कानूनों के विरोध में जारी आंदोलन के बीच वीरवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार और किसान नेताओं में साढ़े सात घंटे वार्ता हुई। सरकार का दावा है कि करीब-करीब बात बन चुकी है। 5 दिसंबर को दोपहर 2 बजे होने वाली बैठक में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। जबकि किसान नेता तीनों कानून रद्द कराने पर अड़े हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दबाव का असर सरकार पर वार्ता में दिखा है। मीटिंग में समझौते का फार्मूला लगभग तैयार हो गया है, लेकिन कुछ संशय हैं, जिन पर 5 दिसंबर को चर्चा होगी।

मीटिंग के बाद केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि किसानों से उनकी दिक्कतों पर विस्तार से चर्चा हुई है। एमएसपी समेत 2-3 बिंदुओं पर किसानों की चिंता जायज है। हम चाहेंगे कि एमएसपी को मजबूत किया जाए। मंडी सिस्टम को और मजबूत बनाया जाएगा। पराली और बिजली एक्ट को लेकर किसान चिंतित हैं। इस पर भी सरकार विचार करेगी। किसानों की कृषि मंत्री तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल से मीटिंग हुई। साेमप्रकाश भी मौजूद रहे। बैठक तीन चरणों में हुई, लंच से पहले किसान नेताओं ने आपत्तियां रखीं। इसके बाद में सरकार ने रुख बताया। चाय के बाद सरकार और किसान नेताओं में सवाल-जवाब हुए। वहीं, किसानों ने कहा कि 5 दिसंबर को देशभर में पीएम और कॉर्पोरेट के पुतले फूंक प्रदर्शन करेंगे।

किसानों ने सरकार से बातचीत तो की... लेकिन खाना अपना खाया

एमएसपी की गारंटी वाला कानून बनना चाहिए। हमें इस पर शंका है।
नए कानूनों से एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर मार्केट कमेटी खत्म हो सकती हैं।
विवाद होने पर एसडीएम की कोर्ट में न्याय नहीं मिलेगा। वह छोटी कोर्ट है।
नए कानूनों से छोटे किसानों की जमीनें बड़ी कंपनियां हथिया लेंगी।
पराली जलाने पर सजा, 1 करोड़ का जुर्माना रद्द हो।

पहले तनातनी... देर शाम कई मुद्दों पर केंद्र की नरमी

{ 11:46 बजे किसान फिर कृषि मंत्री व रेल मंत्री पहुंचे। 12 बजे बैठक शुरू।
{ किसान नेताओं ने 10 पन्नों का आपत्ति पत्र कृषि सचिव को सौंपा। 5 मुख्य बिंदु थे। एपीएमसी एक्ट में 17, एसेंशियल कमॉडिटी एक्ट में 8 व कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग में 12 जगह आपत्ति।
{ किसान नेता बलदेव सिंह ने कहा, मंडी सिस्टम खत्म हो जाएगा और सरकारी खरीद बंद हो जाएगी तो एमएसपी की गारंटी फिर कौन देगा?
{ शिव कुमार कक्का ने कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग की कमियां बताईं व आपत्तियां पढ़ीं।
{ 3:35 बजे लंच ब्रेक के बाद मीटिंग शुरू हुई। केंद्रीय कृषि सचिव ने कहा एमएसपी कहीं नहीं जा रहा। कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग में भी दिक्कत नहीं आएगी। फिर भी एसडीएम कोर्ट का विकल्प है। मंडियां खत्म नहीं हो रहींं।
{ 1 घंटे उन्होंने कृषि बिलों, फिर बिजली व प्रदूषण मुद्दे पर बात रखी।
{ 5:15 बजे किसानों ने चाय से मना कर दिया। इसी दौरान रेल मंत्री ने फोन पर शाह को जानकारी दी।
{ 5:40 फिर से शुरू हुई मीटिंग में किसानों और कृषि मंत्री के बीच सवाल-जवाब हुए।
{ 5:50 मीटिंग में मौजूद एकमात्र महिला किसान नेता कविता ताल्लुकदार ने कई मीडिया रिपोर्ट प्रस्तुत की। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट का भी हवाला दिया। कहा, कानूनों से बुरा हाल होगा। हमें मालूम है कि सरकार किसानों को मारना चाहती है।
{ कृषि मंत्री ने कहा कि एमएसपी में बदलाव नहीं होगा। मंडियां बढ़ेंगी।
{ चढूनी ने मीटिंग में एक बिजनेस ब्रांड का उदाहरण दिया और कहा कि वो अभी से कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग में किसानों को लूट रहे हैं। बिहार के किसानों की आज जो हालत है, उसके लिए सरकार का रवैया जिम्मेदार है।
{ कृषि सचिव ने कहा ये कानून किसी ब्रांड नहीं, किसानों के फायदे के लिए।
{ किसानों ने एक आवाज में कहा कि हमें कुछ नहीं सुनना है। सरकार एक दिन का विशेष सत्र बुलाए और तीनों कृषि कानूनों को रद्द करे।
{ कृषि मंत्री ने किसानों से कहा कि शांत रहें, बातचीत से हल निकलेगा। हम एक्सपर्ट्स से अध्यययन करवा लेते हैं। एमएसपी की गारंटी, खरीदारों के रजिस्ट्रेशन, बिजली और प्रदूषण बिलों में सुधार के 10 पॉइंट्स पर सरकार और किसान नेताओं में सहमति बनती दिखी।
{ अभी भी 5-6 पॉइंट्स ऐसे हैं जिन पर पेंच अटका हुआ है।

12:05 बजे कैप्टन शाह से मिले... 1:30 बजे बादल ने पद्म विभूषण लौटाने की घोषणा की

आंदोलन से पंजाब की अर्थव्यवस्था और देश की सुरक्षा प्रभावित, जल्द खत्म करें

केंद्र के कृषि कानूनों को लेकर जारी गतिरोध जल्द खत्म करवाने के लिए सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने वीरवार दोपहर 12:05 बजे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। 35 मिनट तक चली मीटिंग के बाद कैप्टन ने कहा कि किसानों के लंबे आंदोलन के कारण पंजाब की अर्थव्यवस्था और देश की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। सीएम ने आंदोलन को लेकर केंद्र को अपने स्टैंड पर फिर से विचार करने के लिए कहा ताकि हल निकाला जा सके। सीएम ने कहा कि समस्या का जल्द हल पंजाब और देश, दोनों के हित में है। एमएसपी और मंडी सिस्टम जारी रखना चाहिए। कैप्टन बोले- किसानों की आशंकाएं दूर करने में पहले ही काफी देर हो चुकी है। अब और ज्यादा विलंब नहीं होना चाहिए।

मेरे पास कुछ और नहीं है, मैं किसानों के लिए अपना सम्मान लौटा रहा हूं

पंजाब के 5 बार सीएम रहे परकाश सिंह बादल ने वीरवार को किसानों के मुद्दे पर 5 साल पहले मिला पद्म विभूषण पुरस्कार लौटाने का एलान किया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखे पत्र में बादल ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। आज मैं जो भी हूं, किसानों के कारण हूं। केंद्र के रवैये से आहत हूं। सरकार जब विधेयक लाई थी तब किसानों को पूरी तरह संतुष्ट करने का आश्वासन दिया था। इस पर भरोसा कर मैंने किसानों से सरकार पर विश्वास करने की अपील की थी। सरकार के मुकरने से मैं स्तब्ध रह गया। केंद्र के विश्वासघात से दुखी हूं। किसानों के समर्थन में लौटाने के लिए मेरे पास इससे ज्यादा कुछ नहीं। सरकार से किसानों की आशंकाएं दूर करने के लिए कहा पर किसी ने नहीं सुनी।



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हरियाणा के किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी।


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