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Tuesday, December 22, 2020

ब्लैक राइस, ड्रैगन फ्रूट की फसल से लाखों कमा रहे किसान

कांकेर कृषि प्रधान जिला है तथा यहां धान की खेती ही लगभग सभी किसान करते हैं। पिछले कुछ सालों में जिले के किसानों का रूख उन्नत कृषि की ओर बढ़ रहा है। कुछ किसानों ने तो लीक से हटकर अपने खेतों में प्रयोग करते अत्यधिक उल्लेखनीय काम किए हैं। किसान दिवस पर प्रस्तुत है ऐसे तीन किसानों की कहानी जो अपने काम से दूसरों के लिए उदाहरण बने हुए हैं।
घोटुलमुंडा में उगाया औषधीय गुणों वाला ब्लैक राइस : जिले के युवा उन्नत किसान ढकेश्वर भास्कर ने जिले के घोटुलमुंडा क्षेत्र में ब्लैक राइस यानी काला चावल उगाया है। किसान विकास समिति से जुड़े ढ़केश्वर ने बताया कि अब तक 267 किस्मों के बस्तर संभाग के देसी धानों को संरक्षित कर चुके हैं। धान के जिन किस्मों को संरक्षित किया जा रहा है उनमें कुछ औषधि गुण वाले भी हैं। लायचा धान में चर्म रोग दूर करने की क्षमता है। धान के भूसा से इसकी दवा बनती है। ब्लैक राइस यानी काला धान जिसे स्थानीय बोली में कायरल गाटो कहा जाता है जहां भी लगाया जाता है। देखने लोग जुटने लगते हैं। काला चावल होने के कारण डिमांड बढ़ रही है। वर्तमान में घोटुलमुंडा में 35 एकड़ में किसानों द्वारा इसकी फसल ली जा रही है। डेयरी-पशु-मत्स्य पालन से परिवार की आय दस गुना : नरहरपुर के ग्राम थानाबोड़ी निवासी महिला किसान लेकेश बाई 41 वर्ष 12वीं शिक्षित है। पहले परिवार 6 एकड़ खेत में पारंपरिक धान लगाता था जिससे सालाना 50 से 60 हजार तक आय होती थी। 2012-13 में महिला किसान कृषि विज्ञान केंद्र कांकेर पहुंची जहां से टपक सिंचाई तथा समंवित कृषि प्रणाली को समझा। इस प्रणाली को अपनाने से धान की उपज तो बढ़ी साथ में सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन, बतख पालन, बकरी पालन, मुर्गीपालन, डेयरी व्यवसाय भी शुरू किया। अब उतने ही खेत में पूरा परिवार मिलकर 10 से 12 गुना यानी 7 से 8 लाख रूपए प्रतिवर्ष आय अर्जित कर रहा है। उन्हें उन्नत कृषि के लिए कई पुरस्कार मिले।

पखांजूर के किसान ने उगा दिया थाईलैंड का ड्रैगन फ्रूट
पहले सब्जियों की खेती की फिर मछली पालन से देश में अलग पहचान बनाने वाले पीवी 122 के किसान विद्युत मंडल थाईलैंड में होने वाला फल ड्रेगन फ्रूट उगा रहे हंै। वे रिश्तेदार के घर घूमने बंगलादेश गए थे जहां थाईलैंड से आयात होने वाले ड्रेगन फ्रूट पर नजर पड़ी। उसकी कीमत भारतीय मुद्रा में 700-800 रूपए किलो थी। वापस लौटते ही ड्रेगन फ्रूट फसल पर काम शुरू किया। थाईलैंड से बीज मंगाए, घर के पास खेत में 300 ड्रेगन फ्रूट पौधे लगाए। दो सालों में फल लगे तो गांव गांव से लोग देखने आने लगे। पहली फसल आई तो लोग खरीदने खेतों तक पहुंच गए। भारतीय बाजार में 700-800 रूपए किलो बिकने वाला ड्रेगन फ्रूट इस किसान ने 300-400 रूपए किलो बेचा। किसान विद्युत मंडल के अनुसार इसका पौधा एक बार लगाने पर 20 सालों तक फलता है। प्रत्येक पौधा एक सीजन में 25 से 30 किलो फल देता है। सालाना प्रति एकड़ 3 से 5 लाख तक का मुनाफा होता है।



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