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Saturday, December 26, 2020

किसान संगठनों ने पूर्व मंत्री सुरजीत ज्याणी की कोठी घेरी

फाजिल्का के गांव कटैहड़ा में आज पूर्व मंत्री सुरजीत ज्याणी की कोठी को किसानों ने घेर लिया और जमकर नारेबाजी की। किसानों का कहना था कि सुरजीत ज्याणी को दो बार लगातार विधायक बनाया किंतु ज्याणी अब मोदी, अंडानी व अंबानी की बोली बोल रहा है जिसके चलते वह सुरजीत ज्याणी की कोठी को घेरने के लिए सुरजीत ज्याणी की कोठी पहुंचे हैं।

इस अवसर पर भारी संख्या में किसान मौजूद रहे जिनके द्वारा केंद्र सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की गई और कहा गया कि जब तक कृषि कानूनों को केंद्र सरकार द्वारा रद्द नहीं किया जाता तब तक उनके द्वारा इस तरह के प्रदर्शन जारी रहेंगे तथा भाजपा नेताओं का विरोध किया जाएगा।

इस दौरान किसान नेताओं ने कहा सुरजीत ज्याणी पहले किसानों के पक्ष में खड़े होकर दावा करते थे कि वह किसानों के सच्चे हितैषी है तथा किसान के बेटे हैं किंतु वह आज किसानों के खिलाफ बोलने लगे हैं जिससे उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची हैं ।

जब तक किसानों के मसले पर बात नहीं, तब तक धरना जारी रहेगा

जब तक वह उनके साथ किसानी के मसले संबंधी बात नहीं करते तब तक उनका यह पक्का व अनिश्चतकालीन धरना जारी रहेगा। रात को यहां बकायदा लंगर पकेगा तथा किसान यहां पर धरना लगाकर सोएंगे। उन्होंने कहा कि यदि ज्याणी किसान हिमायती हैं तो वह उनके बीच इस धरने में बैठे तथा अपने भाजपा के पद से इस्तीफा दें।

किसानों ने बताया कि ज्याणी का कहना था कि उनका यह मसला 4 दिन में हल हो जाएगा किंतु इससे पहले भी ज्याणी द्वारा 2 बार किसान संगठनों से बैठक करवाई गई थी जोकि बेनतीजा रही थी ।

इस अवसर पर भारतीय किसान यूनियन एकता के पिप्पल सिंह ने बताया कि उनको आज अफसोस है कि जहां पर उनको किसानों के पक्ष में बात करने आना था वहां पर उनको ज्याणी के घर के समक्ष धरना लगाना पड़ा है तथा उनके द्वारा अमन व शांति से दिया गया धरना कृषि विरोधी काले बिलों के रद्द किए जाने तक अनिश्चतकालीन समय तक जारी रहेगा।

जत्थेबंदियां नहीं चाहतीं कि फैसला हो

इस संबंध में सुरजीत ज्याणी का कहना था कि वह किसान विरोधी नहीं बल्कि किसान हितैषी हैं। आज किसान संगठनों की ताकत उभरकर सामने आई है लेकिन इस ताकत का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह 3 बार चुनाव विजेता बने हैं तथा उन्होंने फाजिल्का जिले के लिए काम भी किया है।

उन्होंने बताया कि पहले उनकी ड्यूटी लगाई गई थी सरकार व जत्थेबंदियों की बात करने की। पहले वह समझते थे कि सरकार इस संबंधी बात नहीं करना चाहती लेकिन जब उन्होंने सरकार से इसके बारे में बात करनी चाही तो पता चला कि जत्थेबंदियां नहीं चाहती कि फैसला हो।

इस कानून संबंधी जब उन्होंने वकील बुलाकर बात की तो पता चला कि इस कानून से किसी को कोई नुकसान नहीं होगा। यदि इस कानून का कोई नुकसान होगा तो इससे उनको भी नुकसान होगा क्योंकि उनके पास भी किसानी के अलावा और कोई काम नहीं है।



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पूर्व मंत्री सुरजीत ज्याणी के घर के सामने धरना देते हुए किसान संगठन।


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