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Wednesday, January 6, 2021

दिल्ली धरने से लौट रहे बरनाला के किसान की मौत, बुखार, जुकाम और इन्फेक्शन था

केंद्र सरकार के खिलाफ चल रहे संघर्ष में 15 दिन तक रहकर दिल्ली से लौट रहे बरनाला के किसान की तबीयत बिगड़ने से रास्ते में मौत हो गई। दिल्ली में पिछले 3 दिन से पढ़ रही बारिश के चलते उसे बुखार, जुखाम व इन्फेक्शन था। मंगलवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उसके साथी उसे बुधवार सुबह दिल्ली से लेकर चले थे। घर पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई। मौत के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। डीएसपी व तहसीलदार मृतक किसान के घर पहुंचे। मृतक किसान नाजर सिंह (48) पुत्र मुंशी सिंह जिले के गांव ढिलवां का रहने वाला था।

22 दिन पहले दिल्ली गया था ढिलवां का नाजर सिंह
भारतीय किसान यूनियन सिद्धूपुर के नेता नछत्तर सिंह, करनैल सिंह गांधी, बलौर सिंह, मनप्रीत सिंह ने कहा कि गांव ढिलवां के किसान नाजर सिंह 22 दिन पहले यूनियन के जत्थे में शामिल होकर दिल्ली गया था। तब से वह संघर्ष में शामिल था। पिछले दिनों से पड़ रही बारिश के कारण उसे ठंड लग गई। इसके चलते उसे बुखार और इंफेक्शन हो गई। मंगलवार रात को उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी।

एसजीपीसी ने किया 1 लाख की आर्थिक सहायता का एलान
किसान की लाश देर शाम गांव पहुंची। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग उनके घर जमा हो गए। किसान नेताओं ने कहा कि पूरा कर्ज माफ, 10 लाख मुआवजा, पारिवारिक मेंबर को सरकारी नौकरी जब तक ये तीनों मांगे जब तक पूरी नहीं होती तब तक किसान का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। साथ ही किसान को शहीद का दर्जा दिया जाए। एसजीपीसी मेंबर बलदेव सिंह चूंगा ने कहा कि किसान बेहद गरीब परिवार से था। उनकी मौत बेहद दुखदाई है। एसजीपीसी की तरफ से मृतक किसान के भोग पर 1 लाख का चेक परिवार को भेंट किया जाएगा। जिससे उनकी आर्थिक कमजोरी थोड़ी ठीक हो सके।

किसान नेताओं ने कहा- परिवार के एक सदस्य को नौकरी दे सरकार
किसान नेताओं ने बताया कि नाजर सिंह एक गरीब किसान था। उसके पास केवल ढाई एकड़ जमीन है। उस पर भी 10 लाख का कर्ज है। उसके पीछे एक पत्नी बेटा या बेटी है। कमाने का वह अपने परिवार का अकेला ही सहारा था। उन्होंने बताया कि यह सबसे किसान नेता के चले जाने से उनके परिवार के सहारे के तौर पर अब कोई नहीं रहा है। इसलिए अब सरकार उसका पूरा कर्ज माफ करें। उसके साथ ही 10 लाख रुपये का मुआवजा दें। इसके साथ उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दें। जिससे उनके परिवार का गुजारा चल सके। नहीं तो उन पर रोटी का भी संकट गहरा जाएगा। परिवार बहुत ही गरीब है।



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Barnala farmer returning from Delhi dharna had death, fever, cold and infection


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