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Tuesday, January 5, 2021

जमीन के बदले जमीन के लिए पहले आओ पहले पाओ की स्कीम, प्रभावितों के पास पहुंचेगा प्रोफार्मा

शहर के बीच सीसी सड़क के निर्माण होने के बाद एक बार फिर सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। अब नाली व पाथ-वे के लिए जमीन की जरूरत है। जिसके लिए प्रभावितों से चर्चा करने मंगलवार को जिला पंचायत के सभा कक्ष में चेंबर आफ कामर्स ने बैठक बुलाई। बैठक में आधे प्रभावित ही शामिल हुए जिनसे चौड़ीकरण के लिए सहमति बनाने पर चर्चा की गई। जमीन के बदले जमीन देने व उसकी नीति बनाने की जानकारी देते बताया गया जो पहले आएगा उसका पहले प्रकरण बना जगह दी जाएगी। सहमति बनाने सभी प्रभावितों के पास नगर पालिका के माध्यम से प्रोफार्मा भेजा जाएगा। जिसमें प्रभावित अपनी सहमति या असहमति दर्ज कराएंगे। इसके साथ ही उनके सुझाव भी मांगे गए।
बैठक में मौजूद अधिकांश प्रभावित अपनी सहमति देते रहे। लेकिन कुछ प्रभावित इस पर सवाल भी उठाते रहे जिससे साफ था कि वे इसे लेकर सहमत नहीं है। हालांकि प्रोफार्मा पहुंचने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा की कुल 131 प्रभावितों में से कितने जमीन के बदले जमीन के लिए सहमत हैं या फिर मुआवजा के लिए। बैठक में मुख्यमंत्री के संसदीय सलाहकार राजेश तिवारी ने विस्तृत चर्चा करते योजनाओं को प्रभावितों के सामने रख उनसे सहमति मांगी। यह भी कहा कि इसके लिए कोई जोर जबरदस्ती नहीं है। सारा निर्णय प्रभावित व व्यापारियों को ही लेना है। वे जैसा चाहेंगे उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। लेकिन शहर को सुंदर व स्वच्छ बनाने नाली तथा पाथ वे बनाना भी जरूरी है। इसके लिए सड़क चौड़ीकरण का कार्य किया जाएगा। इसमें जो प्रभावित हो रहे हैं उन्हें जमीन के बदले जमीन देने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए प्रभावित यदि सहमत है तो जल्द से जल्द अपनी सहमति दें। हाल में ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कांकेर प्रवास होगा जहां इसे लेकर चर्चा की जाएगी और इसके लिए नीति बनाने भी कहा जाएगा। यह नीति बनी तो कांकेर ऐसा पहला शहर होगा जहां जमीन बदले जमीन दी जाएगी और यह पूरे प्रदेश के लिए आदर्श होगा। राजेश तिवारी ने यह भी कहा कि जिनकी सहमति पहले आएगी उनका पहले प्रकरण तैयार कर आगे बढ़ाया जाएगा। किसी का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। यहां पूरा कार्य विधिवत किया जाएगा। ताकि बाद में किसी को कोई परेशानी न हो। बैठक में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ठाकुर, कांचेका अध्यक्ष दिलीप खटवानी के अलावा प्रभावित उपस्थित थे।

प्रभावितों के व्यवस्थापन की योजना
बैठक में जानकारी दी गई कि जो लोग प्रभावित हो रहे हैं उन्हें जमीन के बदले जमीन दी जाएगी। दुकानदारों को डेली मार्केट, जेल के निकट, माहुरबंदपारा के सर्किल इंस्पेक्टर के भवन की जगह पर, पुराना बस स्टेंड में बनने वाले काम्पलेक्स में दुकानों के लिए जगह दी जाएगी। इसके अलावा मेन रोड में जहां अतिक्रमण है उसे भी हटा कर जगह दी जाएगी। जितनी जगह चौड़ीकरण में जा रही है उतने मूल्य की जगह इन स्थानों पर दी जाएगी। यहां फ्री होल्ड जमीन ड्रा निकाल कर देना है या फिर किसी और माध्यम से यह प्रभावित व व्यापारी ही तय करेंगे।

मुआवजा बनाम जमीन पर चर्चा
बैठक में मुआवजा बनाने जमीन पर ज्यादा चर्चा की गई। जानकारी दी गई कि जो प्रभावित जमीन की जगह मुआवजा लेना चाहता है वह उसकी अपनी इच्छा है। उसके अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी। लेकिन वर्तमान में मुआवजा उतना अधिक नहीं मिलेगा जितनी जमीन की बाजार कीमत है। क्योंकि जमीन खरीदी बिक्री सरकारी दर पर कर उसका रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। जबकि बाजार कीमत उसकी काफी ज्यादा होती है। इसलिए मुआवजा भी सरकारी दर के अनुसार ही बनेगा। जबकि जमीन लेने पर उसकी कीमत मुआवजा से कहीं ज्यादा होगी।

किसी ने किया स्कीम का स्वागत तो किसी ने सवाल
बैठक में मौजूद अधिकांश प्रभावित स्कीम का स्वागत करते अपनी सहमति देते रहे। लेकिन कुछ प्रभावित इस पर सवाल भी उठाते रहे जिससे साफ था कि वे इसे लेकर वे अभी पूरी तरह सहमत नहीं है। सुनील गोस्वामी ने पूछा कि जमीन के अलावा भवन का भी आंकलन किया जाएगा। ललित गांधी ने कहा इसे लेकर प्रभावितों का भ्रम दूर करना होगा। सभी लोग चाहते हैं नाली व पाथ वे बने। लेकिन जो प्रभावित हो रहे उन्हें पहले यह जानकारी हो कि उनकी कितनी जगह जा रही है और उन्हें कहां जगह मिल रही है। फिर इस पर आगे कार्रवाई की जाए। टांक सर, रऊफ शेखानी, अनुराग श्रीवास्तव, नितिन दवे, दिनेश कोचर आदि ने भी इसे लेकर सवाल उठाते रहे।

सहमति का ऐसा होगा प्रोफार्मा
चौड़ीकरण के लिए सभी प्रभावितों के पास नगर पालिका द्वारा एक प्रोफार्मा भेजा जाएगा। जिसमें प्रभावित का नाम व उसकी जमीन का विवरण होगा। इसमें यह भी दर्ज होगा कि उक्त प्रभावित की कितनी जमीन 9 मीटर चौड़ाई के दायरे में आ रही है। इसके अलावा प्रोफार्मा में अन्य जानकारी भी होगी। प्रोफार्मा जमा करने एक निश्चित समय दिया जाएगा। जिसे पढ़ कर प्रभावित अपनी सहमति या असहमति उसमें दर्ज करेगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।



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First come first served scheme for land instead of land, proforma will reach the affected


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